
हजरत निज़ामुद्दीन से यशवंतपुर के लिए रवाना होने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में यात्रियों को उस समय बेहद मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा, जब ट्रेन से तृतीय एसी का बीईआई कोच ही गायब पाया गया। इस कोच में करीब 51 यात्रियों ने पहले से टिकट रिज़र्व करा रखा था, लेकिन ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुँचने पर उन्हें पता चला कि उनकी बोगी पूरी तरह से गायब है और सिस्टम में दिखाए गए कोच का पता तक नहीं चल रहा। मजबूरी में जिन यात्रियों ने लंबी यात्रा के लिए आरामदायक सीट खरीदी थी, उन्हें दिल्ली से लेकर ग्वालियर तक खड़े होकर सफर करना पड़ा। कई लोग अपने परिवारों के साथ थे, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी असहज और थकाने वाली साबित हुई। यात्रियों के चेहरे पर निराशा, गुस्सा और असहायता साफ झलक रही थी, लेकिन मौके पर मौजूद रेलवे स्टाफ समाधान देने में असमर्थ दिखाई दिया।
स्थिति बिगड़ने पर कई यात्रियों ने तत्काल रेलवे की आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराई, साथ ही Rail Madad मोबाइल ऐप के माध्यम से भी मदद मांगने की कोशिश की। हालांकि, यात्रियों का दावा है कि इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और न ही समस्या का समाधान करने के लिए रेलवे अधिकारियों की तरफ से किसी प्रकार का मार्गदर्शन दिया गया। कई यात्रियों का यह भी कहना है कि हेल्पलाइन से मिलने वाला जवाब सामान्य और औपचारिक था, जिसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं देखा गया। इन तकनीकी सेवाओं का उद्देश्य यात्रियों को कठिन स्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करना है, मगर इस घटना ने इन व्यवस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुस्साए यात्रियों ने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने उनसे चुपचाप यात्रा करने का दबाव बनाया और ज्यादा हंगामा न करने की सलाह दी। कथित तौर पर कर्मचारियों का रवैया सहयोगी होने के बजाय दबाव डालने जैसा लगा, जिससे यात्रियों में असंतोष और बढ़ गया। कई यात्रियों ने यह चिंता भी जताई कि जब रिज़र्वेशन सिस्टम यात्रियों को सीट नंबर और कोच अलॉटमेंट प्रदान करता है, तो ट्रेन प्रबंधन स्तर पर उस कोच को ट्रेन से जोड़ने में ऐसी लापरवाही कैसे हो सकती है। यह घटना न सिर्फ रेलवे के संचालन तंत्र की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और भरोसे पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
ग्वालियर स्टेशन पहुँचने पर जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो रेलवे को अतिरिक्त कोच लगाने की व्यवस्था करनी पड़ी। हालांकि यह कदम यात्रियों के दबाव के बाद लिया गया, लेकिन तब तक लोग घंटों तक तकलीफ झेल चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में रेलवे को कोच प्रबंधन, बोगी शेड्यूलिंग और रैक प्लानिंग में और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी अव्यवस्था से बचा जा सके। यात्रियों ने मांग की है कि रेलवे इस चूक की जिम्मेदारी तय करे और ऐसी घटनाओं के लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करे। साथ ही तकनीकी शिकायत प्लेटफॉर्म को भी अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनाने की जरूरत है, ताकि वास्तविक समय में समाधान मिल सके और यात्रियों की यात्रा सुरक्षित व आरामदायक बन सके।

