
चीन में चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने एक उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के शोधकर्ताओं और मेडिकल संस्थानों ने एक उन्नत AI सिस्टम विकसित किया है जो बिना लक्षण वाले पैंक्रियाज (अग्न्याशयी) कैंसर को ऐसे चरणों में पहचान सकता है जहाँ पारंपरिक तकनीकों से पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। इस AI तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से CT (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन इमेजों के गहन विश्लेषण के लिए किया जाता है, जिससे छोटे बदलाव और सूक्ष्म पैथोलॉजिकल संकेत भी पहचाने जा सकते हैं जो मानव नेत्र से आसानी से छूट जाते हैं। इससे कैंसर की शुरुआती स्थिति में पहचान संभव हुई है, जो मरीजों के इलाज के विकल्प और बेहतर परिणाम को संभव बनाता है।
पैंक्रियाज कैंसर को चिकित्सा जगत में “कैंसरों का राजा” कहा जाता है, क्योंकि यह अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के तेजी से आगे बढ़ता है और मरीजों का 5-साल का जीवन दर बेहद कम होता है। परंपरागत डायग्नोस्टिक उपायों में देर से पता चलने की प्रवृत्ति होती है, जिससे ज्यादातर मामलों में इलाज कठिन हो जाता है। AI-आधारित मॉडल ने इस चुनौती को टक्कर देते हुए CT इमेजों में मौजूद सूक्ष्म ट्यूमर, असामान्य ऊतक और पैथोलॉजिकल संकेतों को इतने पहले चरण में पकड़ लिया है कि अब कई मामलों में सर्जिकल इलाज समय रहते संभव हो पाया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक की संवेदनशीलता और विशिष्टता काफी उच्च है, जिससे गलत-सकारात्मक दर भी कम होती है और चिकित्सीय निर्णयों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
पैंक्रियाज कैंसर के मामले में इलाज के बाद भी 5 साल तक जीवित रहने की औसत दर बहुत कम मानी जाती है, इसलिए समय पर पहचान जीवनरक्षक साबित हो सकती है। AI-उपकरणों के माध्यम से, विशेष रूप से ऐसे रोगियों में जो कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखा रहे हैं, कैंसर के शुरुआती चरण में ही पता चल जाता है, जिससे सर्जरी और इलाज के विकल्प खुलते हैं। यह तकनीक न केवल चीन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय में भी बड़े पैमाने पर प्रभाव डाल सकती है, जहाँ समय पर पहचान मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर करती है।

