
हाल ही में IndiGo एयरलाइंस में उड़ानों की भारी रद्दीकरण (cancellations) और एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी की स्थिति के बीच, एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। कंपनी के वरिष्ठ प्रशिक्षक Captain Anand Chaurasia ने दावा किया है कि कई पायलट उपलब्ध होने के बावजूद, एयरलाइंस ने जानबूझकर उनका रोस्टर (duty roster) जारी नहीं किया। उनका कहना है कि उड़ानों को पहले से रद्द कर दिया गया था — फिर भी यात्रियों को बुलाया गया, जिससे कई एयरपोर्ट पर混乱 की स्थिति पैदा हुई।
उनके इस खुलासे ने यह सवाल उठा दिया है कि क्या यह एक नियोजित “प्रबंधन विफलता” थी या एयरलाइंस की ओर से एक रणनीतिक कदम। कई पायलटों और कर्मचारी सूत्रों ने यह कहा है कि रोस्टर नहीं भेजने तथा क्रू को असाइन न करने का फैसला यात्रियों, क्रू और नियामक प्राधिकरण के लिए चुनौती था। इस वजह से यात्रियों को अचानक फ्लाइट रद्दीकरण, लंबी देरी, और सूचना की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा — कई लोग रातों रात एयरपोर्ट पर फंसे रहे।
इस घटना पर नज़र रखते हुए, अब यह देखना होगा कि एयरलाइन क्या सफाई देती है, और क्या नियामक संस्थायें (crew-roster management, श्रम व सुरक्षा नियम) इस पूरे मसले की जांच करेंगी। यह घटना भारतीय वायु-यातायात व्यवस्था में सुरक्षा, भरोसा और यात्रियों के अधिकारों के संबंध में बड़े सवाल खड़े करती है।

