
राजस्थान की राजनीति में उस वक्त एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब कांग्रेस नेता सचिन पायलट पहली बार अपने बेटे के साथ एक सार्वजनिक प्रदर्शन में शामिल हुए। जयपुर में आयोजित NSUI के ‘अरावली बचाओ’ पैदल मार्च में उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। यह मार्च अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर निकाला गया था।
इस पैदल मार्च में बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ता और पर्यावरण से जुड़े समर्थक शामिल हुए। सचिन पायलट ने इस दौरान अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन और पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक ढाल है, जिसका संरक्षण बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक हलचल तब और तेज हो गई, जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता हनुमान बेनीवाल ने कार्यक्रम स्थल से मंच हटवाने की मांग की। बताया गया कि बेनीवाल ने इसे जन आंदोलन बताते हुए मंच से भाषण की बजाय सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने पर जोर दिया। इसके बाद मौके से मंच हटवा दिया गया, जिससे कार्यक्रम पूरी तरह पैदल मार्च के रूप में आगे बढ़ा।
सचिन पायलट का बेटे के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होना सोशल और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे राजनीति के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर परिवार की भागीदारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
‘Aravali Bachao’ मार्च के जरिए आयोजकों ने सरकार से अरावली क्षेत्र में सख्त पर्यावरण कानून लागू करने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

