
सार:
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सोमवार सुबह पहाड़ दरकने से बागेश्वर-गरुड़ मोटर मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। रवाईखाल के पास अचानक मलबा और बोल्डर सड़क पर आ गिरने से मार्ग करीब तीन घंटे तक बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और एंबुलेंस समेत सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। बाद में मलबा हटाए जाने के बाद यातायात सुचारु कराया गया।
विस्तार:
बागेश्वर-गरुड़ मोटर मार्ग पर सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रवाईखाल के पास अचानक पहाड़ का एक हिस्सा दरक गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरने के कारण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रुक गई।
पहाड़ दरकने के बाद सड़क पर मलबा फैल गया, जिससे दोनों तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिला। देखते ही देखते मार्ग पर वाहनों की कतार लगनी शुरू हो गई।
मलबा आने के कारण बागेश्वर-गरुड़ मार्ग करीब तीन घंटे तक बाधित रहा। इस दौरान सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में वाहन फंस गए। यात्रियों को मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ा।
जाम में छोटे-बड़े वाहनों के साथ एंबुलेंस भी फंस गई। इससे स्थिति और गंभीर हो गई, क्योंकि आपातकालीन सेवा के वाहन के जाम में फंसने से मरीजों और उनके स्वजन की परेशानी बढ़ गई।
मार्ग बंद होने का असर बड़ी संख्या में यात्रियों पर पड़ा। बागेश्वर और गरुड़ की ओर आने-जाने वाले सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
लंबे समय तक वाहन खड़े रहने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पहाड़ी मार्ग होने के कारण वैकल्पिक रास्ते की सुविधा भी सीमित रही, जिसके चलते लोगों को सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा।
मार्ग बाधित होने की सूचना मिलने के बाद सड़क से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। भारी बोल्डर और मलबे को हटाकर सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए साफ किया गया।
करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद मार्ग से मलबा हटाया जा सका, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ। जाम में फंसे वाहनों को आगे निकाला गया और बागेश्वर-गरुड़ मार्ग पर आवाजाही फिर शुरू हो सकी।
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में बारिश के दौरान पहाड़ दरकने और सड़क पर मलबा आने की घटनाएं लगातार चुनौती बनी रहती हैं। पहाड़ी सड़कों पर अचानक बोल्डर और मलबा गिरने से यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
रवाईखाल की घटना ने एक बार फिर पर्वतीय मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा और सड़क की निगरानी की जरूरत को सामने ला दिया है। खासतौर पर ऐसे स्थानों पर, जहां पहाड़ी से मलबा गिरने की आशंका रहती है, प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।
इस घटना में सबसे चिंताजनक पहलू एंबुलेंस का जाम में फंसना रहा। आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सड़क बंद होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
बारिश के मौसम में संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और मलबा हटाने वाली मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित रखना जरूरी है, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके।
पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के दौरान सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। पहाड़ों से पत्थर गिरने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में वाहन रोकने या लंबे समय तक खड़े रहने से बचना चाहिए। मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेना भी जरूरी है।
रवाईखाल में पहाड़ दरकने के बाद करीब तीन घंटे तक बागेश्वर-गरुड़ मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। हालांकि मलबा हटने के बाद सड़क पर आवाजाही बहाल कर दी गई, लेकिन बारिश के मौसम में इस तरह की घटनाएं दोबारा होने की आशंका बनी रहती है।
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