
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख Mohan Bhagwat ने लिव-इन रिलेशनशिप, विवाह और पारिवारिक मूल्यों को लेकर एक बार फिर सख्त और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लिव-इन में रहने वाले लोग अक्सर जिम्मेदारी निभाने से बचते हैं, जबकि भारतीय समाज की बुनियाद जिम्मेदारी और संस्कारों पर टिकी हुई है। भागवत के मुताबिक, रिश्तों को केवल सुविधा या इच्छा के आधार पर नहीं, बल्कि दायित्व और स्थायित्व के साथ देखा जाना चाहिए।
भागवत ने विवाह को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शादी को सिर्फ शारीरिक संतुष्टि का माध्यम बनाकर देखना गलत है। उनके अनुसार, विवाह का उद्देश्य परिवार, समाज और अगली पीढ़ी के निर्माण से जुड़ा होता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पश्चिमी सोच के प्रभाव में रिश्तों को अस्थायी बना दिया गया है, जिसका सीधा असर सामाजिक ढांचे पर पड़ रहा है।
बच्चों की संख्या के सवाल पर RSS प्रमुख ने कहा कि परिवार नियोजन जरूरी है, लेकिन इसे केवल संख्या तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की कोई सख्त सीमा तय नहीं है, लेकिन तीन बच्चों का परिवार एक “आदर्श मॉडल” हो सकता है। उनका तर्क था कि इससे जनसंख्या संतुलन बना रहता है और समाज में जिम्मेदार नागरिक तैयार होते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में लिव-इन रिलेशनशिप, विवाह की बदलती परिभाषा और जनसंख्या नीति को लेकर बहस तेज है। समर्थक इसे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि निजी जीवन के फैसलों में सामाजिक संगठनों को संयम बरतना चाहिए। बावजूद इसके, यह बयान एक बार फिर परिवार, विवाह और जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ले आया है।

