
भोपाल की 52 किलोमीटर लंबी Bhopal Bypass जिसे 2013 में लगभग ₹242 करोड़ की लागत से बनाया गया था, पिछले वर्षों में उस पर वसूली गई टोल राशि अब ₹270.29 करोड़ तक पहुंच चुकी है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार यही आंकड़ा है — यानी बुनियादी निर्माण लागत से भी कहीं ज़्यादा राजस्व हासिल हुआ।
लेकिन यह खुशी-की बात नहीं है, क्योंकि हाल ही में bypass का एक 75–100 मीटर हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे 20–30 फुट गहरा गड्ढा हो गया। इस धंसाव के पीछे Madhya Pradesh Road Development Corporation (MPRDC) ने प्रारंभिक जांच में कहा है कि अवैध मिट्टी खोदने और जल निकासी अवरुद्ध होने के कारण इम्बैंकमेंट कमजोर हुआ था। साथ ही, तकनीकी निरीक्षण में यह खुलासा हुआ कि आर ई वॉल (retaining wall) निर्माण के समय निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं बनाई गई थी — यानी निर्माण गुणवत्ता में गड़बड़ी रही।
इसी को लेकर Pratap Grewal नामक कांग्रेस विधायक ने तीखा सवाल उठाया है: “जब सरकार ने सड़कों के रख-रखाव (maintenance) में पैसा नहीं लगाया, मरम्मत नहीं की — फिर किस अधिकार से जनता से टोल टैक्स लिया गया?” ये सवाल इसलिए जायज़ दिखते हैं क्योंकि रोज-मर्रा में bypass से यात्रा करने वाले लोग पहले से ही दुर्घटनाओं का डर महसूस कर रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार की जवाबदेही, सार्वजनिक धन के उपयोग और निर्माण व रख-रखाव की वास्तविक स्थिति पर गहरी नज़र डालने की मांग को फिर से उजागर कर दिया है।

