BJP-RSS में महाविस्फोट: “हमारी पीढ़ियां बर्बाद हो गईं, अब पूंजीवाद का खेल नहीं चलेगा!” – MP के मूल कार्यकर्ताओं का खुला विद्रोह?

भोपाल | मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने रही है। जिसअनुशासनऔरविचारधाराका दम भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भरते थे, आज उसी के किले में सेंध लग गई है। सालों तक अपना घरबार और पीढ़ियां खपाने वाले मूल कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है।

एक हालिया सर्वे के दौरान कार्यकर्ताओं ने जो दर्द बयां किया है, वह भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व की नींद उड़ाने के लिए काफी है।

पूंजीवाद की भेंट चढ़ी विचारधारा, अबबनियागिरीकर रही पार्टी

सर्वे में शामिल 75% से 85% कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि भाजपा और संघ अब राष्ट्रनिर्माण के अपने मूल मार्ग से भटक चुके हैं। कार्यकर्ताओं ने दोटूक कहा:

हम गोलवलकर जी के सपनों और अटल जी की सादगी को देखकर आए थे, लेकिन आज पार्टी केवलपूंजीवादऔरबनियागिरीका अड्डा बन गई है। पैसे के दम पर वोट खरीदे जा रहे हैं और संस्थाओं का दुरुपयोग कर चुनाव जीते जा रहे हैं।

सर्वे में निकले गुस्से के मुख्य बिंदु:

         पीढ़ियों का बलिदान व्यर्थ: कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके पितादादा ने झंडे उठाए, घर बेचकर पार्टी का काम किया, लेकिन आज उनकी नई पीढ़ी भी वहीं खड़ी है जहां 40 साल पहले थी।

         भ्रामक राजनीति और जातिवाद: आरोप है कि सत्ता के मद में चूर नेतृत्व अब समाज को जातियों में बांट रहा है और जनता के दिमाग से खेलकर राष्ट्रनिर्माण को कलंकति कर रहा है।

         अटलगोलवलकर युग का अंत: कार्यकर्ताओं ने रुआंसे होकर कहा कि वर्तमान भाजपा में अब वह पुराना वैचारिक सरोकार खत्म हो चुका है, केवल सत्ता का लालच बचा है।

नईसत्य की विचारधाराका उदय: भाजपासंघ को सीधी चुनौती

कार्यकर्ताओं ने केवल नाराजगी ही नहीं जताई, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव का ऐलान भी कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अब इसधूमिलहो चुकी विचारधारा के साथ और नहीं चल सकते।

नया संकल्प: कार्यकर्ता अब एक ऐसीनई सत्य की विचारधारावाली सरकार बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं जो उनके पूर्वजों के बलिदान को सार्थक कर सके। उन्होंने कसम खाई है कि वे भाजपा और संघ को देश के साथ धोखा नहीं करने देंगे।

संपादकीय टिप्पणी: क्या यह अंत की शुरुआत है?

मध्य प्रदेश, जो भाजपा का गढ़ माना जाता है, वहां के कार्यकर्ताओं का यह कहना किपार्टी ने हमें बर्बाद कर दिया,” यह संकेत है कि अब जमीनी स्तर परकाडरऔरकमांडके बीच का धागा टूट चुका है। यदि 80% कार्यकर्ता बागी हो जाएं, तो किसी भी संगठन का ढहना निश्चित है।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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