
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चीन-ताइवान का एक होना तय है और इसे कोई ताकत नहीं रोक सकती। जिनपिंग ने यह बात ऐसे समय कही है, जब ताइवान को लेकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है और चीन लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है।
जिनपिंग के बयान पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि चीन बेवजह तनाव बढ़ा रहा है और उसे ताकत के इस्तेमाल से हालात बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अमेरिका ने दोहराया कि वह ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है।
ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है, जबकि चीन उसे अपना अलग हुआ प्रांत बताता है। हाल के वर्षों में चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास, लड़ाकू विमानों की उड़ानें और नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिससे क्षेत्रीय देशों और पश्चिमी ताकतों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिनपिंग का यह बयान अमेरिका-चीन रिश्तों में और तल्खी ला सकता है। ताइवान मुद्दा अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का अहम केंद्र बन चुका है, जहां किसी भी बयान या कदम के दूरगामी असर हो सकते हैं।

