
मृदुभाषी और सरल स्वभाव वाले एक सीनियर आईएएस इन दिनों लगातार कोर्ट के मामलों में उलझे हुए हैं। साहब की परेशानी की वजह उनकी शाखा के खिलाफ अदालत में धड़ाधड़ दायर हो रही याचिकाएं हैं। आलम यह है कि इन याचिकाओं के जवाब तैयार करवाते-करवाते साहब खासे परेशान बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि साहब की इस शाखा में नई पदस्थापना कुछ महीने पहले ही हुई है।
जिन मामलों को लेकर एक के बाद एक याचिकाएं दायर हो रही हैं, वे सभी साहब के आने से पहले के बताए जा रहे हैं। यानी फैसले पहले हुए और जवाबदेही अब साहब के हिस्से आ गई है। साहब की स्थिति पर एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है—”करे कोई, भरे कोई।” यही वजह है कि शाखा के खिलाफ लगातार सामने आ रहे कोर्ट के मामलों को लेकर साहब को जवाब तैयार करवाने और पुरानी स्थितियों से जुड़े मामलों को देखने में परेशानी हो रही है।
बताया जाता है कि साहब भी अपनी शाखा की मौजूदा स्थिति को लेकर यही बात कहते नजर आ रहे हैं। नई पदस्थापना के बाद पुराने मामलों की वजह से लगातार अदालत में याचिकाएं सामने आने और उनके जवाब तैयार कराने की जिम्मेदारी अब उनके सामने है। ऐसे में सीनियर आईएएस की परेशानी का कारण उनकी शाखा से जुड़े पहले के मामलों को बताया जा रहा है।
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