
दिल्ली हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर वकीलों को हर छोटे दस्तावेज के लिए कार्यालय बुलाया जाएगा, तो उनका काम करना मुश्किल हो जाएगा। यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें Central Bureau of Investigation (CBI) ने ई-मेल से दस्तावेज भेजने के बावजूद वकील को अपने कार्यालय बुलाया था। अदालत ने इसे व्यावहारिक कठिनाइयों से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना।
मामले की सुनवाई के दौरान Delhi High Court ने कहा कि डिजिटल दौर में जब दस्तावेज आधिकारिक ई-मेल के जरिए साझा किए जा सकते हैं, तब केवल औपचारिकता के नाम पर वकीलों को बार-बार कार्यालय बुलाना न्यायिक प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को समय, संसाधन और पेशेवर सुविधा—तीनों का संतुलन बनाकर काम करना चाहिए।
अदालत ने CBI की इस कार्यवाही पर नाराजगी जताते हुए मामले के जांच अधिकारी (IO) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट का कहना था कि जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए। सुनवाई के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि तकनीक का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना है, न कि उसे जटिल करना।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह टिप्पणी भविष्य में जांच एजेंसियों और वकीलों के बीच संवाद के तौर-तरीकों को प्रभावित कर सकती है। अगर अदालतें डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने का रुख अपनाती हैं, तो इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि न्यायिक व्यवस्था भी अधिक कुशल बन सकेगी। फिलहाल, IO की पेशी के बाद अदालत इस मामले में आगे के निर्देश दे सकती है।

