
डेनमार्क ने अपनी सुरक्षा नीति को लेकर कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। देश की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि किसी भी हमले की स्थिति में सैनिक पहले जवाब देंगे और बाद में बातचीत होगी। इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा हालात के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
डेनमार्क की सैन्य नीति में हुए इस बदलाव के तहत सैनिकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे बिना किसी उच्चस्तरीय आदेश के सीधे हमले का जवाब दे सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि तेजी से बदलते हालात में देरी जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए फ्रंटलाइन पर मौजूद जवानों को तुरंत फैसला लेने की छूट दी गई है।
इसी बीच, एक रिपोर्ट ने ग्रीनलैंड को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को औपचारिक रूप से खरीदे बिना भी उस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है। ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है, जहां सैन्य और आर्थिक दोनों दृष्टि से वैश्विक शक्तियों की नजर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डेनमार्क के इस सख्त रुख और ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ती चर्चाओं से आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और तेज हो सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है, जहां सुरक्षा, संसाधन और प्रभाव को लेकर बड़ी ताकतों के बीच खींचतान देखने को मिलेगी।

