
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच चल रहे विवाद ने एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। डेनमार्क के एक सांसद ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “ट्रम्प भाड़ में जाएं, ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।” सांसद का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड कोई संपत्ति नहीं है जिसे खरीदा या बेचा जा सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ग्रीनलैंड पिछले करीब 800 सालों से डेनमार्क का हिस्सा रहा है और इसकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है, जब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की दिलचस्पी बार-बार सामने आती रही है।
डेनमार्क के नेताओं का कहना है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता और डेनमार्क की संवैधानिक व्यवस्था के तहत ही होगा। किसी भी बाहरी दबाव या प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सांसद के इस बयान को डेनमार्क की सख्त और स्पष्ट राजनीतिक लाइन के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस तरह के बयान अमेरिका-डेनमार्क रिश्तों में और तल्खी ला सकते हैं। ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत, प्राकृतिक संसाधन और आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच यह मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा गर्माने की संभावना है।









