
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी के बढ़ते खतरे और धीमी महंगाई को देखते हुए फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती कर दुनिया को चौंका दिया। यह कदम अर्थव्यवस्था को राहत देने और उधार को सस्ता बनाने के लिए उठाया गया है। लगातार दरों में कटौती से अमेरिकी बाजारों को अस्थायी मजबूती मिल सकती है, लेकिन इसका प्रभाव ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर भी गहराई से पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि फेड की इस आक्रामक पॉलिसी का असर उभरते बाजारों, खासकर भारत पर साफ दिख सकता है। कम दरों के कारण डॉलर कमजोर हो सकता है और विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकाल भी सकते हैं या बड़े पैमाने पर निवेश भी बढ़ा सकते हैं—दोनों ही स्थितियाँ बाजार में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती हैं।
अब सवाल यह है कि क्या फेड की रेट कट का असर भारतीय शेयर बाजार में भूचाल की तरह दिखेगा या मार्केट इसे पहले ही प्राइस-इन कर चुका है। मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगले कुछ दिनों में सेंसेक्स-निफ्टी में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जबकि बैंकिंग और IT सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहेंगे।

