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मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच फ्रांस ने अमेरिका को अपने कुछ सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। यह कदम उस समय सामने आया है जब ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष तेज हो गया है और क्षेत्र में कई देशों की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं।
फ्रांसीसी सैन्य ठिकानों का सीमित उपयोग
रिपोर्ट्स के अनुसार फ्रांस ने अमेरिकी सैन्य विमानों को मध्य-पूर्व में स्थित कुछ फ्रांसीसी बेस का अस्थायी रूप से उपयोग करने की अनुमति दी है। यह व्यवस्था सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए की गई है और इसे स्थायी निर्णय नहीं बताया गया है।
फ्रांस के इन सैन्य ठिकानों का उपयोग मुख्य रूप से सैन्य समन्वय, निगरानी और लॉजिस्टिक समर्थन के लिए किया जा सकता है, हालांकि आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अमेरिकी विमान किन अभियानों के लिए इन बेस का इस्तेमाल करेंगे।
क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां
फ्रांस ने हाल ही में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ाई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को भूमध्य सागर में तैनात करने का आदेश दिया है, ताकि क्षेत्र में सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसके अलावा फ्रांसीसी लड़ाकू विमान, एयर-डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य संसाधनों को भी मध्य-पूर्व में तैनात किया गया है।
यूरोपीय देशों की अलग-अलग रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि जहां फ्रांस और कुछ अन्य सहयोगी देश अमेरिका के साथ सैन्य समन्वय बढ़ा रहे हैं, वहीं कुछ यूरोपीय देशों ने अलग रुख अपनाया है। उदाहरण के लिए स्पेन ने अपने सैन्य बेस को अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर
ईरान-इज़राइल संघर्ष के चलते पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष उड़ानें शुरू की हैं, जबकि समुद्री व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर भी खतरे की आशंका जताई जा रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य उपस्थिति क्षेत्र में और बढ़ सकती है। वहीं कूटनीतिक स्तर पर भी तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं।









