
यूरोपीय राजनीति में बड़ी हलचल के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से यूरोप की सबसे मजबूत धुरी मानी जाने वाली फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी में अब दरार नजर आने लगी है। जर्मनी के चांसलर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे यूरोपीय संघ की एकता पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि जर्मन चांसलर अब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहे हैं। रणनीतिक और राजनीतिक मुद्दों पर मेलोनी से बढ़ती नजदीकियों ने फ्रांस को असहज कर दिया है। मैक्रों को लगता है कि जर्मनी यूरोप में पारंपरिक साझेदारी को कमजोर कर एक नया पावर सेंटर बनाने की कोशिश कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, रक्षा नीति, आर्थिक फैसलों और यूरोपीय नेतृत्व को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराए हैं। मैक्रों जहां यूरोप में फ्रांस की निर्णायक भूमिका बनाए रखना चाहते हैं, वहीं जर्मनी अब अपने हितों के मुताबिक नए सहयोगियों के साथ आगे बढ़ने के संकेत दे रहा है। यही वजह है कि दोनों नेताओं के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिख रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर फ्रांस-जर्मनी गठबंधन कमजोर पड़ता है, तो इसका असर पूरे यूरोपीय संघ पर पड़ेगा। यह जोड़ी अब तक यूरोप की नीतियों की दिशा तय करती रही है, लेकिन बदलते समीकरणों में इटली जैसे देश की बढ़ती भूमिका नई सियासी तस्वीर पेश कर सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यूरोप की यह पारंपरिक ताकतवर जोड़ी खुद को संभाल पाती है या इतिहास का हिस्सा बन जाती है।









