
भारत तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के लिए सबसे अहम बाजार बनता जा रहा है। इसी कड़ी में OpenAI और Google भारतीय यूजर्स को जोड़ने और लोकल ट्रेनिंग डेटा हासिल करने के लिए फ्री फीचर्स और सब्सिडी जैसी रणनीतियों पर जोर दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भारत की विशाल डिजिटल आबादी और बहुभाषी डेटा AI मॉडल्स को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
हाल के महीनों में AI टूल्स के फ्री ट्रायल, स्टूडेंट ऑफर्स और लोकल लैंग्वेज सपोर्ट जैसे कदम देखने को मिले हैं। OpenAI जहां अपने AI चैट और क्रिएटिव टूल्स को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, वहीं Google अपने सर्च, AI असिस्टेंट और क्लाउड प्लेटफॉर्म को भारतीय जरूरतों के हिसाब से ढाल रहा है। इन सुविधाओं के जरिए कंपनियां न सिर्फ यूजर्स बढ़ाना चाहती हैं, बल्कि रियल-वर्ल्ड डेटा से अपने मॉडल्स को भी ट्रेन करना चाहती हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह मुकाबला भारत में AI इनोवेशन को तेज कर सकता है, लेकिन डेटा प्राइवेसी और यूजर कंसेंट जैसे सवाल भी उतने ही अहम हैं। सरकार और रेगुलेटरी संस्थाएं इस बात पर नजर रख रही हैं कि भारतीय यूजर्स का डेटा कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले समय में यह AI रेस भारत के टेक इकोसिस्टम और डिजिटल इकॉनमी की दिशा तय कर सकती है।

