
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ग्रीनलैंड अब खुलकर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका की सख्त चेतावनी के बाद यूरोप के 7 देशों ने ग्रीनलैंड में अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं। इस सैन्य मौजूदगी को क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। पिघलती बर्फ और बढ़ती भू-राजनीतिक अहमियत ने ग्रीनलैंड को महाशक्तियों की नई प्रतिस्पर्धा का मैदान बना दिया है।
जानकारी के मुताबिक, फ्रांस ने 15 सैनिक, जर्मनी ने 13 और ब्रिटेन ने 1 सैनिक ग्रीनलैंड भेजा है। इसके अलावा अन्य यूरोपीय देशों ने भी सीमित संख्या में सैन्य कर्मियों की तैनाती की है। इन सैनिकों को निगरानी, प्रशिक्षण और सहयोगी अभ्यास के नाम पर भेजा गया है, लेकिन इसे अमेरिका के दबाव और रूस-चीन की बढ़ती गतिविधियों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, सभी यूरोपीय देश इस कदम से सहमत नहीं दिख रहे हैं। इटली ने इस सैन्य तैनाती पर सवाल उठाते हुए इसे “मजाक” करार दिया है। इटली का कहना है कि इतनी कम संख्या में सैनिक भेजना न तो किसी बड़े खतरे को रोक सकता है और न ही इससे वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इटली के इस बयान से यूरोपीय देशों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, ग्रीनलैंड को लेकर यह सैन्य हलचल आने वाले समय में और बढ़ सकती है। आर्कटिक में प्राकृतिक संसाधनों, नई समुद्री राहों और सामरिक बढ़त की होड़ ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में ग्रीनलैंड में बढ़ती विदेशी सैन्य मौजूदगी वैश्विक राजनीति में नए तनाव और समीकरण पैदा कर सकती है।









