
मध्य प्रदेश की प्रशासनिक हलचलों में इन दिनों एक नई चर्चा जोरों पर है। प्रदेश के एक आयोग में हाल ही में पदस्थ हुईं एक महिला आईएएस अधिकारी की कार्यशैली अब विवादों के घेरे में है। आलम यह है कि मैडम के जॉइन करते ही दफ्तर ‘अखाड़े’ में तब्दील हो गया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।
मामला मध्य प्रदेश के एक प्रमुख आयोग का है, जहाँ एक प्रमोटर आईएएस अधिकारी की नई-नई पदस्थापना हुई। नियम और शिष्टाचार तो यह कहता है कि पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग के मुखिया से सौजन्य भेंट की जाए, लेकिन यहाँ मामला उलटा रहा। मैडम ने जॉइनिंग के बाद आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात करना भी मुनासिब नहीं समझा।
विवाद केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं रहा। जॉइनिंग के तुरंत बाद ही आईएएस मैडम अवकाश पर चली गईं। इस अचानक मिली छुट्टी का खामियाजा आयोग के बेगुनाह कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। जरूरी हस्ताक्षरों के अभाव में कर्मचारियों का वेतन अटक गया है, जिससे दफ्तर में भारी नाराजगी व्याप्त है।
आयोग के अध्यक्ष, जो स्वयं एक तेज-तर्रार और ईमानदार छवि वाले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं, इस प्रशासनिक ढिलाई को बर्दाश्त नहीं कर सके। कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी और अनुशासनहीनता को देखते हुए उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर महिला अधिकारी की शिकायत कर दी है।
सत्ता के गलियारों में यह भी चर्चा है कि मैडम का मंत्रालय से इस आयोग में तबादला भी यूँ ही नहीं हुआ था। बताया जा रहा है कि उनके तत्कालीन पीएस ने “काम न करने” की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें यहाँ भेजा गया था।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस शिकायत पर क्या कड़ा एक्शन लेता है। क्या मैडम की वापसी के बाद आयोग में शांति बहाल होगी या यह ‘प्रशासनिक जंग’ और आगे बढ़ेगी?







