
मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी Santosh Verma द्वारा ब्राह्मण बेटियों को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने पूरे समाज में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है। समाज का कहना है कि इतनी संवेदनशील टिप्पणी के बावजूद सरकार द्वारा अब तक किसी भी प्रकार की कड़ी कार्रवाई न किया जाना बेहद निराशाजनक है। कई संगठनों का आरोप है कि इससे यह संदेश जा रहा है कि ऐसी मानसिकता को सरकार का मौन संरक्षण प्राप्त है। समाज प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन में ऐसी सोच वाले अधिकारी सरकारी तंत्र में बने रहने चाहिए? उनका कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे IAS अधिकारी द्वारा ऐसी भाषा का उपयोग न केवल Service Conduct Rules का उल्लंघन है, बल्कि समाज की समरसता को भी चोट पहुँचाता है। मामले ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। समाज के प्रबुद्ध जनों का कहना है कि क्या ब्राह्मण समाज का महत्व केवल चुनाव के समय वोट देने तक ही सीमित है? सम्मान और समाज की बेटियों की गरिमा की रक्षा की बात आते ही सत्ताधारी दल की चुप्पी सवाल पैदा कर रही है। समाज अब इस दोहरे व्यवहार को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
इधर, RSS प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी को लेकर भी समाज में असंतोष है। समाज का कहना है कि संघ हमेशा नारी सम्मान और सांस्कृतिक मूल्य की बात करता है, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व का मौन रहना व्यथित करने वाला है।
