
दिल्ली का IGI एयरपोर्ट अब देश का पहला ऐसा बड़ा विमान हब बन गया है — जो “वाटर-पॉज़िटिव” कहलाने योग्य है। यानी यह एयरपोर्ट जितना पानी उपयोग करता था, उससे कहीं अधिक पानी वह वापस वातावरण या भू-जल में लौटाता है। यह उपलब्धि उन बड़े हवाई अड्डों में महत्वपूर्ण है, जहाँ प्रतिवर्ष करोड़ों यात्री आते-जाते हैं, क्योंकि इससे स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव कम होता है।
इस बदलाव की नींव कुछ सालों से रखी जा रही थी। एयरपोर्ट प्रबंधन ने 625 से अधिक वर्षा-जल संचयन (rainwater harvesting) संरचनाएँ स्थापित की हैं, जिससे बारिश का पानी संग्रहित किया जा सके। साथ ही, दो बड़े भूमिगत जल भंडार बनाए गए हैं — जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 9 मिलियन लीटर की है। इस पानी को बाद में उपयोग और भू-जल पुनर्भरण (recharge) दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इसी के साथ, IGI में आधुनिक अपशिष्ट-जल (wastewater) प्रबंधन की व्यवस्था भी है: एक ज़ीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज (Zero-Liquid Discharge) सीवेज-ट्रीटमेंट प्लांट लगाई गई है, जो प्रतिदिन 16.6 मिलियन लीटर तक पानी को पुन:ोंशोधित (recycle) करती है। इस पुनर्नवीनीकृत जल का उपयोग एयरकंडीशनिंग, फ्लशिंग, लैंडस्केपिंग जैसे गैर-पीने योग्य कामों में किया जाता है।
सिर्फ इतना ही नहीं — IGI ने अपने ग्रीन एरिया और लॉन-लैंडस्केप की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर व ड्रिप-इरीगेशन जैसे पानी-बचत उपाय भी अपनाए हैं। साथ ही यात्रियों के लिए पेयजल की आपूर्ति करने वाली ट्रीटमेंट प्लांट्स में ऐसी टेक्नोलॉजी है कि पानी की बर्बादी न्यूनतम हो। इन समेकित व्यवस्थाओं के कारण, IGI ने प्रमाणपत्र हासिल किया है कि अब वह पानी संसाधनों पर दबाव नहीं, बल्कि राहत दे रहा है। 

