
भारतीय सेना ने 2026 को ध्यान में रखते हुए अपना विस्तृत रणनीतिक रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसमें युद्ध की बदलती प्रकृति को केंद्र में रखा गया है। इस रोडमैप को शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं में बांटा गया है, ताकि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य के खतरों से भी प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। सेना का यह प्लान पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ आधुनिक तकनीक आधारित संघर्षों पर केंद्रित है।
शॉर्ट टर्म प्लानिंग के तहत सेना मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग, तेज निर्णय प्रणाली और डिजिटल कमांड स्ट्रक्चर को मजबूत करने पर काम कर रही है। मीडियम टर्म रणनीति में AI आधारित सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस नेटवर्क को बड़े पैमाने पर शामिल करने की योजना है, जिससे रियल-टाइम जानकारी के आधार पर युद्धक्षेत्र में त्वरित फैसले लिए जा सकें।
लॉन्ग टर्म विजन में भारतीय सेना नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और पूरी तरह डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बढ़ना चाहती है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, स्पेस-बेस्ड सर्विलांस और डेटा-ड्रिवन ऑपरेशंस को भविष्य की जंग का आधार माना गया है। सेना का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा, एल्गोरिद्म और डिजिटल नेटवर्क से लड़े जाएंगे।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोडमैप भारतीय सेना को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और भविष्य के युद्धों के लिए ज्यादा सक्षम बनाएगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह रणनीति न सिर्फ देश की सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में भी स्थापित करेगी।

