
भारतीय फुटबॉल के लिए साल 2025 निराशाजनक साबित हुआ है। एक के बाद एक झटकों ने देश के फुटबॉल प्रशंसकों की उम्मीदों को तोड़ दिया। सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब भारत एशिया कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर टीम की मौजूदगी पर सवाल खड़े हो गए।
एशिया कप से बाहर होने के साथ ही भारतीय फुटबॉल की रणनीति, चयन प्रक्रिया और दीर्घकालिक योजना पर भी बहस शुरू हो गई। लगातार कमजोर प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि टीम एशियाई स्तर की प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट रही है।
इसी बीच लियोनेल मेसी के भारत दौरे को लेकर बना उत्साह भी विवादों में घिर गया। आयोजन से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठे और यह दौरा भारतीय फुटबॉल के लिए उपलब्धि बनने के बजाय विवाद का कारण बन गया। आलोचकों का कहना है कि इस आयोजन ने खेल के विकास से ज्यादा व्यवस्थागत कमजोरियों को उजागर किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 ने भारतीय फुटबॉल की संरचनात्मक समस्याओं को सामने ला दिया है। अब जरूरत है जमीनी स्तर पर सुधार, पारदर्शी प्रशासन और दीर्घकालिक विकास योजना की, ताकि आने वाले वर्षों में भारतीय फुटबॉल फिर से पटरी पर लौट सके।









