
भारतीय रुपया आज फिर कमजोर हुआ और डॉलर के मुकाबले पहली बार 90 के स्तर तक लुढ़क गया। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की यह गिरावट कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है, खासकर उन लोगों को जो आयात पर निर्भर हैं या विदेशी मुद्रा लेनदेन करते हैं।
रुपए के टूटने से सबसे बड़ा नुकसान आयातित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और इंफ्लेशन के रूप में सामने आ सकता है। इसके अलावा, क्रूड ऑयल और गोल्ड जैसे कमोडिटीज के दाम भी बढ़ सकते हैं। एक्सपोर्टर्स के लिए यह स्थिति कुछ हद तक लाभदायक है, क्योंकि विदेशी मुद्रा में उनकी कमाई बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर अंतरराष्ट्रीय डॉलर मजबूत बना रहता है और भारत में विदेशी निवेश धीमा रहता है, तो रुपया और नीचे जा सकता है। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में रुपया 90–91 के स्तर तक गिरने की संभावना जताई जा रही है।
आर्थिक सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों और आम जनता को इस समय सावधानी बरतनी चाहिए, और लंबी अवधि के निवेश या विदेश यात्रा से जुड़ी योजनाओं में रुपये की कमजोरी को ध्यान में रखना जरूरी है।


