
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन-क्षेत्र (electronics manufacturing sector) ने पिछले ग्यारह वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का कुल आकार अब लगभग ₹11.32 लाख करोड़ हो गया है — यह पिछले दशक की तुलना में लगभग छह गुना (6×) बढ़ोतरी है।
इसी दौरान, भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स विक्रय/निर्यात (exports) में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है। पिछले 11 सालों में, निर्यात ₹ 3.26 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है — जो कि पूर्व के स्तर की तुलना में लगभग आठ गुना (8×) अधिक है। इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग न सिर्फ घरेलू मांग पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
विश्लेषकों और उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस ग्रोथ का श्रेय सरकार की नीतियों, मेक-in-India पहल, उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजनाओं और विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीतियों को जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे यदि निवेश और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन इसी रफ्तार से चलता रहा, तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
इस वृद्धि का मतलब है — घरेलू मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक्स की उपलब्धता बढ़ेगी, पुरानी आयात-निर्भरता कम होगी, और विदेशी मुद्रा बचत के साथ-साथ صادرات से राजस्व बढ़ेगा।

