
2 अक्टूबर 2026। हर साल 2 अक्टूबर को भारत में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। इसी दिन दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। यह दिन महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के विचारों को याद करने के साथ शांति, सहिष्णुता, संवाद और समझ को बढ़ावा देने का अवसर है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2007 को प्रस्ताव A/RES/61/271 के जरिए 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया था।
आज के दौर में जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष, हिंसा, असमानता और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दे मौजूद हैं, ऐसे समय में अहिंसा के विचार की चर्चा फिर महत्वपूर्ण हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र भी इस दिन शिक्षा और जनजागरूकता के जरिए अहिंसा का संदेश फैलाने पर जोर देता है।
2 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस?
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस 2 अक्टूबर को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1869 में गुजरात के पोरबंदर में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था। गांधी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को अपने सार्वजनिक जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में अपनाया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव और अन्याय के अनुभवों ने भी गांधी के विचारों और संघर्ष की पद्धति को आकार देने में भूमिका निभाई।
गांधी वर्ष 1915 में भारत लौटे और आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध के लिए अहिंसक आंदोलन और जनभागीदारी को प्रमुख माध्यम बनाया। 1930 का दांडी मार्च इसका एक प्रमुख उदाहरण है। गांधी और उनके साथियों ने नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक करीब 240 मील की यात्रा की थी।
गांधी के लिए अहिंसा का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं था। उनके विचारों में सत्य, आत्मसंयम, सहनशीलता और अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से थे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अहिंसक प्रतिरोध का उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करना नहीं, बल्कि बिना हिंसा के प्रभावी तरीके से बदलाव के लिए संघर्ष करना है।
संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में दी आधिकारिक मान्यता
महात्मा गांधी के विचारों को वैश्विक स्तर पर मान्यता देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2007 को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के संबंध में प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य शिक्षा और जनजागरूकता के माध्यम से अहिंसा का संदेश फैलाना था। संयुक्त राष्ट्र ने अहिंसा को शांति, सहिष्णुता और समझ की संस्कृति से जोड़ते हुए इसके सार्वभौमिक महत्व को रेखांकित किया।
इस प्रस्ताव को भारत की ओर से तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने महासभा में पेश किया था और इसे 140 देशों का समर्थन मिला था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गांधी की अहिंसा की विचारधारा ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में नागरिक अधिकार और सामाजिक बदलाव के आंदोलनों को प्रभावित किया।
अहिंसा का संदेश केवल स्वतंत्रता आंदोलनों तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग देशों में सामाजिक और नागरिक अधिकार आंदोलनों ने भी शांतिपूर्ण प्रतिरोध के तरीकों को अपनाया। इस कारण गांधी का नाम अहिंसक संघर्ष और सामाजिक बदलाव की वैश्विक चर्चा से जुड़ा रहा है।
अहिंसा दिवस का क्या है महत्व?
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस का उद्देश्य लोगों को यह समझाने से भी जुड़ा है कि किसी संघर्ष का समाधान हमेशा हिंसा के जरिए नहीं किया जा सकता। संवाद, बातचीत, शांतिपूर्ण विरोध और आपसी समझ के जरिए भी सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अहिंसक कार्रवाई में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, मार्च, जनजागरूकता, असहयोग और अन्य गैर-हिंसक तरीके शामिल हो सकते हैं। यानी अहिंसा का मतलब निष्क्रिय रहना नहीं है। यह अन्याय या असहमति के खिलाफ आवाज उठाने का ऐसा तरीका भी हो सकता है जिसमें शारीरिक हिंसा का इस्तेमाल न किया जाए।
भारत में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में गांधी को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके विचारों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित होते हैं। शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों में भी अहिंसा, स्वच्छता, सामाजिक सद्भाव और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आज के डिजिटल दौर में भी प्रासंगिक हैं गांधी के विचार
अहिंसा की चर्चा अब केवल आमने-सामने होने वाले संघर्षों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच भाषा और व्यवहार में संयम भी महत्वपूर्ण हो गया है। ऑनलाइन नफरत, अपमानजनक टिप्पणियां और भेदभाव सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी नफरत फैलाने वाली भाषा, भेदभाव और असहिष्णुता को हिंसा और सामाजिक विभाजन से जोड़ते हुए इसके खिलाफ जागरूकता की जरूरत बताई है। ऐसे में संवाद, सहिष्णुता और दूसरे के विचारों को समझने की कोशिश अहिंसा के व्यापक संदेश का हिस्सा बनती है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 2026 के अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस संदेश में गांधी की विरासत को याद करते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए मतभेदों को दूर करने तथा शांतिपूर्ण दुनिया के निर्माण पर जोर दिया।
इस लिहाज से 2 अक्टूबर केवल गांधी जयंती या एक अंतरराष्ट्रीय दिवस नहीं, बल्कि शांति, संवाद और अहिंसक तरीके से बदलाव की सोच को याद करने का अवसर है। गांधी का जीवन और सत्याग्रह यह दिखाता है कि सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हुए भी अहिंसा को एक महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा सकता है।
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