
वियतनाम के दा लात शहर में 25 सितंबर को हुए सड़क हादसे में झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान रांची के 24 वर्षीय राजा कुमार और जमशेदपुर के 25 वर्षीय विनय कुमार राय के रूप में हुई है। दोनों वियतनाम में योग शिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे। अब परिवार उनके पार्थिव शरीर भारत लाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। झारखंड सरकार ने दोनों मृतकों के निकटतम परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही है।
झारखंड के दो युवा योग प्रशिक्षकों की वियतनाम में हुए सड़क हादसे में मौत के बाद उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है। दा लात शहर में 25 सितंबर को हुए हादसे में रांची के राजा कुमार और जमशेदपुर के विनय कुमार राय की जान चली गई। दोनों रोजगार के सिलसिले में वियतनाम गए थे और वहां योग प्रशिक्षण देकर अपने परिवार का सहारा बने हुए थे।
कार से टकराया दोपहिया वाहन
जानकारी के मुताबिक, राजा और विनय दोपहिया वाहन से जा रहे थे। इसी दौरान उनका वाहन एक कार से टकरा गया। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों को गंभीर चोटें आईं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राजा की हादसे में मौत हो गई, जबकि विनय को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था। बाद में उनकी भी मौत हो गई।
दोनों युवक वियतनाम की आदि योग अकादमी में योग शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे। बेहतर रोजगार की तलाश में विदेश गए इन युवाओं ने योग को अपना पेशा बनाया था। परिवार के मुताबिक, वे वहां से पैसे भेजकर घर के खर्च में भी मदद करते थे।
परिवार को अब पार्थिव शरीर का इंतजार
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता दोनों युवकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की है। रांची निवासी राजा कुमार के परिवार ने बताया कि शव भारत लाने में बड़ी रकम खर्च होने की जानकारी मिली थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अकेले इतना खर्च उठा सके। इसी वजह से परिजनों ने सरकार से मदद की अपील की थी।
वहीं, विनय के परिवार की ओर से भी जल्द से जल्द पार्थिव शरीर घर लाने की कोशिश की जा रही है। वियतनाम में रहने वाले भारतीय समुदाय और युवकों के परिचित भी इस प्रक्रिया में परिवारों की मदद कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, विनय के दोस्तों और भारतीय समुदाय के लोगों ने शव भारत भेजने के लिए करीब 20 लाख रुपये का फंड जुटाया है।
कागजी प्रक्रिया पूरी करने में जुटे अधिकारी
पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। वियतनाम में स्थानीय पुलिस की ओर से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC जारी किए जाने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि डेथ सर्टिफिकेट मिलने की जानकारी भी सामने आई है। भारतीय दूतावास से भी प्रक्रिया जल्द पूरी कराने में सहयोग की मांग की गई है।
झारखंड श्रम विभाग के माइग्रेशन सेल की टीम भी मामले में परिवारों की सहायता कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों युवकों के पार्थिव शरीर इस सप्ताह भारत लाए जाने की उम्मीद है।
सरकार देगी 5-5 लाख रुपये
झारखंड सरकार ने दोनों मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। माइग्रेशन सेल की प्रमुख शिखा लकड़ा के अनुसार, पार्थिव शरीर भारत पहुंचने के बाद राज्य सरकार के नियमों के तहत दोनों मृतकों के निकटतम परिजनों को 5-5 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी।
विदेश में काम कर रहे दो युवाओं की अचानक मौत से उनके परिवारों पर दुख के साथ आर्थिक संकट भी आ गया है। फिलहाल परिजन जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने और अपने बेटों के पार्थिव शरीर के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
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