
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर नारेबाजी को लेकर विवादों में घिर गया है। कैंपस में कथित तौर पर लगाए गए ‘कब्र खुदेगी’ जैसे नारों ने सियासी और वैचारिक बहस को तेज कर दिया है। इस मुद्दे के सामने आने के बाद छात्र संगठनों के बीच तनाव का माहौल बन गया है और मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
इस पूरे विवाद पर ABVP ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन का आरोप है कि इस तरह के नारे हिंदू विरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं और कैंपस में जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। ABVP नेताओं ने इसे विश्वविद्यालय की परंपराओं और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ बताया है।
ABVP ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नफरत फैलाने वाले नारों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनका दावा है कि इस तरह की गतिविधियां कैंपस के माहौल को बिगाड़ती हैं और छात्रों के बीच विभाजन पैदा करती हैं।
वहीं, इस विवाद ने एक बार फिर JNU में वैचारिक टकराव और कैंपस राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दे अकसर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक छवि को प्रभावित करते हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस विवाद का क्या नतीजा निकलता है।

