
अफ्रीकी देश केन्या इन दिनों लगातार बढ़ते तापमान, बदलते मौसम पैटर्न और लम्बे सूखे का सामना कर रहा है। जल संकट और सूखी चरागाहों ने पशुपालन को बुरी तरह प्रभावित किया है, विशेष रूप से गायों पर निर्भर ग्रामीण परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी चुनौती के बीच ऊंट एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रह सकते हैं और किसानों के लिए आर्थिक सहारा प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सूखे की स्थिति में ऊंट गायों की तुलना में अधिक सहनशील पाए गए हैं। जहां गायों को लगातार हरी घास और पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, वहीं ऊंट कम पानी में भी लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और कठोर वातावरण को आसानी से झेल सकते हैं। यही कारण है कि केन्या के कई इलाकों में पशुपालक अब ऊंट पालन की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में स्थिरता बनी रहती है।
किसानों का कहना है कि ऊंट का दूध बाजार में काफी मांग रखता है और इसे पौष्टिक माना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ऊंट के दूध में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व अधिक पाए जाते हैं, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर भी इसकी खपत बढ़ रही है। कई किसान सूखे के दौरान ऊंट के दूध और उससे बने उत्पादों को बेचकर नियमित आय अर्जित कर रहे हैं।

