
सार
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन उज्जैन में फिलहाल इसका खास असर नहीं दिख रहा है। शहर के 30 हजार से अधिक घरों और सौ से ज्यादा उद्योगों तक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति हो रही है। श्री महाकालेश्वर मंदिर के अन्नक्षेत्र में भी इसी गैस से रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी तैयार की जा रही है, जिससे यहां गैस संकट की कोई स्थिति नहीं बनी है।
विस्तार
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस आपूर्ति को लेकर चिंता जताई जा रही है, लेकिन उज्जैन में फिलहाल इसकी स्थिति सामान्य बनी हुई है। शहर के हजारों घरों, उद्योगों और धार्मिक स्थलों तक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति होने के कारण यहां रसोई गैस संकट की आशंका काफी कम दिखाई दे रही है। यही कारण है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर के अन्नक्षेत्र में भी रोजाना श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी बिना किसी रुकावट के तैयार हो रही है।
दरअसल, पीएनजी एक प्राकृतिक गैस है, जिसे पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों, प्रतिष्ठानों और उद्योगों तक पहुंचाया जाता है। एलपीजी सिलेंडर की तुलना में इसे अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि खुले वातावरण में इसके ज्वलन का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है। इसके साथ ही सिलेंडर बदलने की झंझट भी नहीं रहती। सुविधा, सुरक्षा और अपेक्षाकृत कम कीमत के कारण उज्जैन में इसके उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहर में अवंतिका गैस लिमिटेड द्वारा पीएनजी की आपूर्ति की जा रही है।
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के अन्नक्षेत्र में भी भोजन प्रसादी पीएनजी गैस से ही तैयार की जाती है। यहां रोज देशभर से भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले करीब दस हजार श्रद्धालु निःशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। पीएनजी कनेक्शन होने के कारण मंदिर में गैस आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार की परेशानी सामने नहीं आई है और व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है।
देश के कई बड़े मंदिरों और प्रसादालयों में एलपीजी सिलेंडर का उपयोग होने के कारण गैस संकट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि उज्जैन के महाकाल मंदिर में पीएनजी की सुविधा होने के कारण यहां इस संकट का असर दिखाई नहीं दे रहा है और श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के भोजन प्रसादी मिल रही है।
अवंतिका गैस लिमिटेड के मीडिया प्रबंधक सुमित कुमार के अनुसार समुद्री मार्ग से जहाजों के जरिए आयात होने वाली गैस की आपूर्ति पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन पीएनजी पाइपलाइन के माध्यम से शहर तक पहुंचती है, इसलिए फिलहाल इसकी आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में पीएनजी के दाम बढ़ने की संभावना भी कम है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
पीएनजी की तरह सीएनजी गैस की उपलब्धता भी फिलहाल पर्याप्त बनी हुई है। ऐसे में सीएनजी वाहनों का उपयोग करने वाले चालकों को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी और उन्हें पेट्रोल की तुलना में सस्ती गैस मिलती रहेगी।
हालांकि शहर में एक और पहलू भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार लगभग 60 प्रतिशत होटल, रेस्टोरेंट, शादी समारोहों और सड़क किनारे चाय-नाश्ते के ठेलों पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद कुछ व्यापारी व्यवसायिक सिलेंडर की कमी का हवाला देकर खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने की बात कर रहे हैं। ऐसे मामलों में खाद्य विभाग को जांच करनी चाहिए कि संबंधित प्रतिष्ठानों में वास्तव में किस प्रकार के गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा है।
वर्तमान में उज्जैन में 30 हजार से अधिक घरेलू पीएनजी कनेक्शन और 100 से ज्यादा व्यावसायिक कनेक्शन हैं। यहां घरेलू पीएनजी की कीमत करीब 54 रुपये प्रति एससीएम, उद्योगों के लिए 61.51 रुपये प्रति एससीएम और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 65.89 रुपये प्रति एससीएम है। वहीं सीएनजी की कीमत लगभग 93.5 रुपये प्रति किलोग्राम है। शहर में पीएनजी और सीएनजी की कुल खपत करीब 2300 एमएमबीटीयू प्रतिमाह दर्ज की जा रही है, जिससे फिलहाल गैस आपूर्ति की स्थिति स्थिर बनी हुई है।









