मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में ‘शह और मात’ का खेल: कौन बनेगा नए जिले का कलेक्टर?

ब्रांडवाणी डेस्क: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक प्रमुख जिले की कलेक्टर की कुर्सी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। वर्तमान कलेक्टर मैडम के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, जिसके साथ ही नए दावेदार इस कुर्सी के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

इन दावेदारों में सबसे अधिक चर्चा में हैं एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी, जो फिलहाल एक धार्मिक नगरी में कम महत्वपूर्ण यानी ‘लूप लाइन’ वाली पोस्टिंग पर तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, इस अधिकारी ने खामोशी और रणनीति के साथ इस रसूखदार कुर्सी पर अपनी नजरें टिका दी हैं।

पिछले कुछ हफ्तों से उनकी सक्रियता में अचानक इजाफा हुआ है। फोन कॉल्स, मुलाकातों और सिफारिशों का दौर पर्दे के पीछे से तेजी पकड़ चुका है।

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प्रमोशन की तैयारी

इन अधिकारी की इस सक्रियता के पीछे एक ठोस वजह भी है। अगले साल उनका प्रमोशन तय माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि वे प्रमोशन से पहले अपने बायोडाटा में बड़े जिले की कमान का अनुभव जोड़ना चाहते हैं, जो उनकी प्रोफाइल को मजबूत करेगा और भविष्य की बड़ी नियुक्तियों के लिए उनके दावों को पुख्ता करेगा।

दावेदारी की चुनौती

हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है। कलेक्टर मैडम की विदाई के बाद इस कुर्सी के लिए रेस में कई अन्य नाम भी शामिल हैं। लेकिन जिस तरह से इन ‘प्रमोटी साहब’ ने अपनी पोजिशनिंग मजबूत की है, उसने अन्य दावेदारों की चिंता बढ़ा दी है।

अब देखना यह है कि सत्ता के शीर्ष केंद्रों पर बैठे निर्णयकर्ता इन साहब की रणनीति पर मुहर लगाते हैं या बाजी किसी और के हाथ लगती है। फिलहाल, भोपाल से लेकर उस जिले तक, सबकी नजरें इसी कुर्सी के खेल पर टिकी हैं।

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