ब्रांडवाणी एक्सक्लूसिव: राम — दुनिया का सबसे बड़ा ‘एंटी-एस्टेब्लिशमेंट’ (Anti-Establishment) नायक

राम नवमी के अवसर पर ब्रांडवाणी स्पेशल 

ब्रांडवाणी स्पेशल:  हम अक्सर राम को ‘मर्यादा’ के सौम्य घेरे में देखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि राम असल में दुनिया के पहले और सबसे बड़े ‘सिस्टम-चेंजर’ थे? जिस युग में ताकतवर का ही कानून चलता था, उस दौर में राम ने उस पूरे ‘सिस्टम’ को चुनौती दी थी। आज राम नवमी पर, आइए उस राम को समझें जिसे इतिहास की किताबों ने ‘आदर्श’ कहकर थोड़ा सीमित कर दिया, लेकिन वो असल में एक ‘रेडिकल रिवोल्यूशनरी’ थे।

‘प्रोटोकॉल’ तोड़ने वाला राजकुमार

उस दौर के राजसी प्रोटोकॉल के हिसाब से एक राजकुमार को केवल दूसरे राजाओं से संधि करनी चाहिए थी। लेकिन राम ने क्या किया? उन्होंने ‘रॉयल प्रोटोकॉल’ तोड़कर निषादराज को गले लगाया। उन्होंने ऋषियों के आश्रमों में जाकर खुद को उनके अधीन रखा। यह उस समय के ‘क्लास-सिस्टम’ (Class System) पर सबसे बड़ा प्रहार था। राम ने संदेश दिया कि सत्ता का असली केंद्र महल नहीं, बल्कि वह जनता है जो जंगलों में हाशिए पर पड़ी है।

‘राम सेतु’: पत्थरों का नहीं, ‘इगो’ (EAHANKAR) का विसर्जन

इतिहास ने इसे एक पुल के रूप में दर्ज किया, लेकिन दार्शनिक नजरिए से देखें तो यह दुनिया का पहला ‘डिमोक्रेटिक प्रोजेक्ट’ था। राम चाहते तो हनुमान की पीठ पर बैठकर लंका जा सकते थे या अपनी शक्ति से समुद्र सुखा सकते थे। लेकिन उन्होंने एक ‘पुल’ बनाने का विकल्प चुना जिसमें हर वानर और हर गिलहरी का योगदान था। यह संदेश था कि बड़ी से बड़ी बुराई (रावण) को हराने के लिए किसी ‘सुपरहीरो’ की नहीं, बल्कि ‘कलेक्टिव विल’ (सामूहिक इच्छाशक्ति) की जरूरत होती है।

रावण का वध नहीं, ‘अहंकारी तकनीक’ का अंत

रावण के पास उस समय की सबसे उन्नत तकनीक थी—पुष्पक विमान, अभेद्य लंका और अजेय शस्त्र। वह आज के ‘सिलिकॉन वैली’ के किसी अहंकारी टाइकून जैसा था जो प्रकृति को अपनी दासी समझता था। राम ने उसे हराने के लिए सादगी और प्रकृति (धनुष-बाण और पैदल सेना) का सहारा लिया। यह ‘लो-टेक बनाम हाई-टेक’ की पहली जंग थी, जहाँ मानवीय मूल्यों और ‘एथिक्स’ ने तकनीक के अहंकार को मिट्टी में मिला दिया।

‘मर्यादा’ — बेड़ी नहीं, बल्कि ‘अल्टीमेट फ्रीडम’

हम मर्यादा को अक्सर ‘बंदिश’ समझते हैं, लेकिन राम के लिए मर्यादा ‘सेल्फ-कंट्रोल’ की पराकाष्ठा थी। जिसके पास अजेय शक्ति हो, वो अगर मर्यादा में रहे, तो वही असली स्वतंत्रता है। राम ने दिखाया कि असली ताकत ‘करने’ में नहीं, बल्कि गलत को ‘न करने’ की क्षमता में है। आज के दौर में जहाँ हर कोई शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है, राम का यह ‘साइलेंस और सेल्फ-रिस्ट्रेंट’ सबसे क्रांतिकारी विचार है।

‘राम राज्य’: जहाँ राजा ‘अकाउंटेबल’ (जवाबदेह) था

आज के दौर में नेता चुनाव के बाद गायब हो जाते हैं, लेकिन राम ने एक धोबी (आम नागरिक) के सवाल पर भी अपनी सबसे प्रिय वस्तु (सीता) का त्याग कर दिया। यह क्रूर लग सकता है, लेकिन यह ‘पब्लिक अकाउंटेबिलिटी’ का वो चरम स्तर था जहाँ राजा के लिए निजी सुख कुछ भी नहीं था। राम ने राज्य को ‘संपत्ति’ नहीं, बल्कि ‘ट्रस्ट’ (धरोहर) की तरह चलाया।

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    Rashel Kachwah Rajput

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