
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आगामी इजराइल दौरे के दौरान नरसंहार में मारे गए यहूदियों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम होलोकॉस्ट स्मारक स्थल पर आयोजित होने की संभावना है, जहां वे इतिहास के सबसे भीषण अत्याचारों में मारे गए लाखों यहूदियों की स्मृति को नमन करेंगे। इस यात्रा को भारत-इजराइल संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दौरे के दौरान पीएम मोदी की मुलाकात इजराइल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर उच्च-स्तरीय वार्ता होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, साइबर सुरक्षा और अत्याधुनिक रक्षा तकनीक से जुड़े समझौते इस यात्रा का मुख्य फोकस हो सकते हैं। भारत और इजराइल पहले से ही रक्षा साझेदारी के प्रमुख साझेदार माने जाते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगी। इजराइल के साथ गहरे होते संबंधों को भारत की सुरक्षा और तकनीकी जरूरतों के लिहाज से अहम माना जाता है। साथ ही, आतंकवाद-रोधी सहयोग, खुफिया साझेदारी और रक्षा उत्पादन में संयुक्त परियोजनाओं पर भी चर्चा संभावित है।
प्रधानमंत्री मोदी का होलोकॉस्ट पीड़ितों को श्रद्धांजलि देना ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की मानवता और इतिहास के प्रति संवेदनशीलता का संदेश जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा न केवल कूटनीतिक बल्कि सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।









