
भोपाल – मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर जोरदार हल्ला मचाया था, लेकिन अब सामने आया है कि पार्टी खुद ही बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति में बुरी तरह पिछड़ गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस ने राज्य के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में अपने बूथ एजेंट तक नियुक्त नहीं किए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लगभग हर बूथ पर अपने प्रतिनिधि तैनात कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और जमीनी स्तर पर तैयारी की कमी को उजागर करती है। कांग्रेस ने मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने और वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे और इसे “चुनाव चोरी” करार दिया था। पार्टी ने दावा किया था कि वह हर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची का बूथ स्तर पर सत्यापन कराएगी और व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी।
हालांकि, अब यह सामने आया है कि कांग्रेस ने जिन बूथों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए थे, वहां भी उसने अपने बीएलए तक नियुक्त नहीं किए। इससे न केवल पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ है कि कांग्रेस मौके पर निगरानी रखने में विफल रही है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, बीएलए की भूमिका मतदाता सूची की निगरानी, संशोधन और आपत्तियों के निवारण में अहम होती है।
इस मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि जो पार्टी खुद अपने बूथ एजेंट तक नहीं बना पा रही, वह चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह कर रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह जल्द ही सभी बूथों पर एजेंट नियुक्त करेगी और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी।

