
मध्यप्रदेश में सरकार के गठन के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियां अब तक नहीं हो पाई हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से असंतोष देखने को मिल रहा है।
नियुक्तियों को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
सूत्रों के मुताबिक जब भी शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक होती है, तब जल्द ही नियुक्तियों की सूची जारी होने के संकेत दिए जाते हैं। इसी उम्मीद में कई नेता भोपाल और दिल्ली में सक्रिय रूप से अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
‘आयातित नेता’ को लेकर नई चर्चा
हाल ही में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा सामने आई है कि एक ‘आयातित नेता’ इन नियुक्तियों की प्रक्रिया में बाधा बन रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह नेता ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में से एक हैं और हाल ही में दूसरी पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ दल में शामिल हुए हैं।
नियुक्ति को लेकर अंदरखाने खींचतान
सूत्रों का दावा है कि जिस नेता ने चुनाव में उक्त ‘आयातित नेता’ को हराया था, उसे किसी निगम या मंडल में महत्वपूर्ण पद मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसी कारण इस नियुक्ति को रोकने के लिए राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है।
पार्टी कार्यकर्ताओं में बढ़ रही उम्मीद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम-मंडलों में नियुक्तियां होने से संगठन में सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी मिलेगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और पार्टी नेतृत्व कब इस बहुप्रतीक्षित सूची को अंतिम रूप देता है।







