
भोपाल, मध्यप्रदेश | मध्यप्रदेश के प्रशासनिक महकमे में इन दिनों एक प्रमोटर आईएएस अधिकारी और उनके वकील पुत्र के बीच का यह वाकया चर्चा का विषय बना हुआ है। पिता के रसूख से मिली ‘पैरवी’ और सुनहरे भविष्य के सपने तब चकनाचूर हो गए, जब एक कानूनी पेच ने पूरे खेल को ही पलट दिया।
सूत्रों के अनुसार, एक प्रमोटर आईएएस अधिकारी ने अपने वकील बेटे के करियर को नई ऊंचाइयां देने के मकसद से उसे एक बड़े विभाग के अधीन आने वाले कॉर्पोरेशन में एम्पैनलमेंट करवा दिया था। पिता को पूरी उम्मीद थी कि बेटा प्रशासनिक कानूनी दांव-पेचों को बखूबी संभालेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
मामला तब बिगड़ा जब कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान तकनीकी त्रुटिवश उस विभाग के प्रमुख सचिव को अवमानना के मामले में पक्षकार बना दिया। गौरतलब है कि वह मामला वास्तव में किसी अन्य विभाग से संबंधित था।
हैरानी की बात यह रही कि ‘होनहार’ वकील बेटे ने बिना तथ्यों की गहराई से पड़ताल किए और बिना उच्च अधिकारियों को सूचित किए, सीधे कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया। इस लापरवाही ने विभाग के मुखिया यानी प्रमुख सचिव को सीधे कानूनी संकट में खड़ा कर दिया।
जब यह मामला प्रमुख सचिव के संज्ञान में आया, तो वे दंग रह गए। अपनी छवि और पद की गरिमा पर आते खतरे को देख उन्होंने तत्काल मोर्चा संभाला:
- त्वरित निष्कासन: आईएएस के बेटे को तत्काल प्रभाव से कॉर्पोरेशन के पैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
- कोर्ट को स्पष्टीकरण: विभाग ने तुरंत न्यायालय को वास्तविक वस्तुस्थिति से अवगत कराया।
इस त्वरित और सख्त कार्रवाई की बदौलत प्रमुख सचिव संभावित अदालती कार्रवाई की जद में आने से बच गए, लेकिन इस घटना ने आईएएस पिता की साख और बेटे के कानूनी करियर पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।







