
मध्य प्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों एक ‘अनोखे’ साहब के चर्चे आम हैं। एक ऐसे युवा IAS अधिकारी, जिन्होंने सरकार चलाने का अपना ही एक नया मैन्युअल (Manual) तैयार कर लिया है। नियम कहते हैं कि अफसर को दफ्तर में बैठकर जनता की समस्याएं सुननी चाहिए, लेकिन इन साहब के लिए ‘काम ही पूजा’ है… बस फर्क इतना है कि यह पूजा दफ्तर के मंदिर में नहीं, बल्कि एक आलीशान गेस्ट हाउस के बंद कमरों में होती है।
खबर आ रही है कि मलाईदार विभाग में तैनात एक युवा IAS साहब ने सरकारी दफ्तर से नाता ही तोड़ लिया है। अब सरकारी फाइलें हों या जरूरी मीटिंग्स, सब कुछ एक निजी कंपनी के लग्जरी गेस्ट हाउस से निपटाया जा रहा है। दिलचस्प बात तो यह है कि साहब ‘सूर्यवंशी’ नहीं, ‘चंद्रवंशी’ बन गए हैं। दिन के उजाले में दफ्तर से नदारद रहने वाले ये अफसर रात के अंधेरे में सक्रिय होते हैं।
मुख्य बिंदु:
- दफ्तर खाली, जनता परेशान: विधायक हों, आम आदमी हो या मातहत कर्मचारी… सब दफ्तर में साहब का इंतज़ार करते रह जाते हैं, लेकिन साहब का कोई अता-पता नहीं होता।
- नाइट शिफ्ट प्रशासन: साहब की इस ‘नाइट शिफ्ट’ कार्यशैली ने विभाग के भीतर एक अनौपचारिक दरबार सजा रखा है, जहाँ रात के सन्नाटे में बड़े फैसले लिए जा रहे हैं।
- रडार पर आए साहब: सूत्रों की मानें तो इस ‘नाइट मोड’ प्रशासन की खबर अब आला अफसरों तक पहुँच गई है। सीनियर अधिकारियों ने इस मनमानी को गंभीरता से लिया है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी गोपनीयता और गरिमा को ताक पर रखकर किसी निजी गेस्ट हाउस से सरकार चलाना जायज है? देखना होगा कि ‘ऊपर’ से आने वाले निर्देश इन साहब की ‘मिस्टर इंडिया’ वाली कार्यशैली पर कब लगाम कसते हैं।







