
भोपाल, 3 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में मानसून सीजन के दौरान करीब 904 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य औसत से कम है। रिपोर्ट के अनुसार 30 जिले सामान्य से कम बारिश वाले रहे, जबकि 11 जिलों में सामान्य बारिश के मुकाबले 80 प्रतिशत से भी कम पानी बरसा। इसका असर खरीफ की फसलों के साथ आने वाली रबी फसलों की तैयारी पर भी पड़ने की आशंका है।
कई जिलों में बारिश की कमी, पश्चिमी MP ज्यादा प्रभावित
इस साल मध्य प्रदेश में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा। कुछ इलाकों में कम समय में तेज बारिश हुई, जबकि उसके बाद लंबे समय तक बारिश का अंतराल बना रहा। इससे कई क्षेत्रों में मिट्टी की नमी तेजी से कम हुई और भूजल रिचार्ज पर भी असर पड़ने की चिंता है।
इंदौर-उज्जैन संभाग में भी सितंबर के अंत तक बारिश की कमी बनी हुई थी। 15 में से 12 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। अलीराजपुर में सामान्य के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत कम बारिश हुई, जबकि इंदौर और उज्जैन में करीब 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
राज्य में कम बारिश का असर जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है। खासकर उन इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां खेती सिंचाई के सीमित साधनों पर निर्भर है। राष्ट्रीय स्तर पर भी 2026 का मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा। IMD के अनुसार जून से सितंबर के दौरान देश में बारिश दीर्घकालिक औसत की करीब 87 प्रतिशत रही, जो 2015 के बाद सबसे कम स्तरों में है।
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सोयाबीन और गेहूं की पैदावार पर असर की आशंका
मध्य प्रदेश में बारिश की कमी का सबसे सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। राज्य में इस साल करीब 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई है। मालवा समेत इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के कई हिस्सों में सोयाबीन प्रमुख खरीफ फसल है। कम बारिश और लंबे सूखे अंतराल से मिट्टी में नमी की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इससे सोयाबीन की उत्पादकता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम उत्पादन का आकलन फसल कटाई और सरकारी कृषि आंकड़ों के बाद ही स्पष्ट होगा।
रबी सीजन में गेहूं की बोवनी पर भी बारिश की कमी का असर पड़ सकता है। पर्याप्त मिट्टी की नमी नहीं होने पर किसानों को शुरुआती सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों ने भी कमजोर मानसून वाले क्षेत्रों में फसल उत्पादन पर दबाव की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार अक्टूबर में भी देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। ऐसे में मध्य प्रदेश के कम बारिश वाले जिलों में किसान, कृषि विभाग और प्रशासन की नजर अब मिट्टी की नमी, जल स्रोतों और रबी फसल की तैयारियों पर रहेगी।
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