प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बार फिर रिश्तेदारी और प्रभाव के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। चर्चा में एक ऐसा मामला है, जहां एक भांजा आईटी कंपनी चलाकर कमाई कर रहा है और उसका मामा प्रदेश के ही एक संवेदनशील विभाग में आईएएस अधिकारी के पद पर कार्यरत है। आरोप है कि मामा के प्रभाव और पद का अप्रत्यक्ष फायदा भांजे को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि भांजे की आईटी कंपनी को विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े काम लगातार मिल रहे हैं। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या यह सब केवल योग्यता के आधार पर हो रहा है या फिर रिश्तेदारी का असर इसमें शामिल है। प्रशासनिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि मामा की भूमिका सीधे तौर पर सामने न आने के बावजूद सिस्टम के भीतर उनका प्रभाव महसूस किया जा रहा है।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि मामा पहले ऊर्जा विभाग में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। आरोप है कि उस दौरान भी भांजे की कंपनी को कुछ प्रोजेक्ट्स मिले थे। भले ही कागजों में सब कुछ नियमों के अनुसार दिखाया जा रहा हो, लेकिन नैतिकता और हितों के टकराव को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों से सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। यदि रिश्तों के आधार पर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, तो यह पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है। अब जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यहां केवल संयोग है या फिर सत्ता और संबंधों का दुरुपयोग।

