
दुनिया की सबसे अहम परमाणु हथियार नियंत्रण संधि New START आज समाप्त हो गई है। इस संधि के खत्म होने के साथ ही अमेरिका और रूस पर लगे परमाणु हथियारों की तैनाती से जुड़े कई अहम प्रतिबंध भी हट गए हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्या थी New START संधि?
New START (Strategic Arms Reduction Treaty) अमेरिका और रूस के बीच आखिरी बड़ी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि थी।
- इसे 2010 में साइन किया गया था।
- यह दोनों देशों के तैनात परमाणु वारहेड्स और मिसाइल सिस्टम की संख्या सीमित करती थी।
- संधि में डेटा शेयरिंग, निरीक्षण और पारदर्शिता जैसे प्रावधान भी शामिल थे, जिससे तनाव कम रखने में मदद मिलती थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के समाप्त होने के बाद अब दोनों देश बिना किसी औपचारिक सीमा के अपने परमाणु हथियार बढ़ा सकते हैं, जिससे नई हथियार दौड़ का खतरा पैदा हो सकता है।
क्यों नहीं बढ़ी संधि की अवधि?
पिछले कुछ महीनों में रूस और अमेरिका के बीच इस संधि को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक साल के विस्तार का प्रस्ताव रखा था।
- लेकिन यूक्रेन युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
अब दुनिया के सामने क्या खतरे?
संधि के खत्म होने के बाद:
- दोनों देशों पर परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की कोई बाध्यता नहीं रहेगी।
- निरीक्षण और डेटा एक्सचेंज की व्यवस्था भी खत्म हो सकती है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, इससे नया परमाणु हथियारों का मुकाबला (arms race) शुरू होने का खतरा बढ़ जाएगा।
क्या ट्रंप विस्तार को मानेंगे?
अब नजरें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टिकी हैं।
- रूस विस्तार के लिए तैयार बताया जा रहा है।
- लेकिन वाशिंगटन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
- अगर बातचीत नहीं होती, तो यह शीत युद्ध के बाद पहली बार होगा जब अमेरिका और रूस के बीच कोई सक्रिय परमाणु नियंत्रण संधि नहीं बचेगी।









