
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां किसान हीरामणि बैस के बेटे सुशांत को गलत तरीके से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल भेज दिया गया। रेत माफिया से जुड़े एक मामले में असली आरोपी नीरजकांत द्विवेदी की जगह टाइपिंग की गलती के कारण सुशांत को एक साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया। इस दौरान परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया और सुशांत की गर्भवती पत्नी मानसिक तनाव से जूझती रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल के तत्कालीन कलेक्टर केदार सिंह पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और अवमानना की कार्रवाई के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि NSA जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल बेहद सावधानी से होना चाहिए, और किसी निर्दोष को जेल भेजना संविधान और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और न्यायिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है। सुशांत के पिता ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके बेटे का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और गलती से उसे जेल भेजा गया, जिससे परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति चरमरा गई।
इस घटना ने NSA के दुरुपयोग पर बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठाया है कि क्या प्रशासनिक अधिकारी बिना पर्याप्त जांच के किसी निर्दोष को जेल भेज सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले को न्यायिक सुधारों की आवश्यकता से जोड़ा है और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।

