
राज्य में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) से जुड़े एक मामले में लापरवाही और न्यायिक आदेशों के अनुपालन में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित जिले के कलेक्टर पर दो लाख रुपये का आर्थिक दंड आरोपित किया है। अदालत ने यह निर्णय तब सुनाया, जब अदालत के पिछले आदेशों के बावजूद प्रशासन की ओर से निर्धारित कार्रवाई समयसीमा में पूरी नहीं की गई। न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी पद पर बैठा अधिकारी कानून के निर्देशों की अवहेलना नहीं कर सकता, और यदि ऐसा होता है तो यह न्यायिक प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुँचाने के समान है। अदालत ने अवमानना अधिनियम के अंतर्गत प्रक्रिया शुरू करते हुए जिम्मेदार अधिकारी को आदेशों के पालन में हुई देरी के लिए व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना है।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि NSA जैसे कठोर कानून का उपयोग अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों में किया जाता है और इसमें प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता व समयबद्धता आवश्यक होती है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता, सुरक्षा या सार्वजनिक शांति का मुद्दा शामिल हो, तो प्रशासनिक सुस्ती अस्वीकार्य है। न्यायालय के repeatedly reminder के बावजूद जब समय पर अपडेट और दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए गए, तब हाईकोर्ट ने इसे गंभीर अवमानना मानते हुए कलेक्टर के खिलाफ यह कठोर कार्रवाई की। अदालत का मानना है कि सरकारी अधिकारी यदि आदेशों का पालन नहीं करते, तो इससे कानूनी व्यवस्था पर जनता का विश्वास डगमगाता है। इस फैसले का असर अब राज्यभर के प्रशासनिक ढांचे में देखा जा रहा है। कई अधिकारियों को इस आदेश के बाद निर्देशित किया गया है कि न्यायालय से संबंधित हर आदेश को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय में पूरा किया जाए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करेगा और अधिकारियों को याद दिलाएगा कि उनका कर्तव्य न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना है। इसके साथ ही, यह संदेश भी गया है कि अदालतें किसी भी प्रकार की टालमटोल की प्रवृत्ति को सहन नहीं करेंगी।
कलेक्टर की ओर से अदालत में प्रस्तुत लिखित जवाब में देरी के लिए तकनीकी और प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया, लेकिन अदालत ने कहा कि यह स्पष्टीकरण स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने आदेश दिया कि जुर्माना सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से जमा किया जाए, ताकि जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट बनी रहे। इसके अलावा अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख निर्धारित करते हुए चेतावनी दी है कि यदि आदेशों का पालन आगे भी नहीं हुआ, तो यह दंड और कठोर हो सकता है तथा आगे की व्यक्तिगत कार्रवाई भी संभव है।

