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PCOS यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में तेजी से बढ़ रही एक हार्मोनल बीमारी है—समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव से इसका निदान संभव है

COS यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हार्मोनल विकार है जो प्रजनन आयु की महिलाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। सितंबर को हर साल PCOS Awareness Month के रूप में मनाया जाता है ताकि महिलाओं को इस बीमारी के लक्षण, कारण और निदान के बारे में जागरूक किया जा सके। इस स्थिति में महिलाओं के अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और गर्भधारण में कठिनाई आती है। इसके लक्षणों में चेहरे और शरीर पर मोटे बाल, मुँहासे, वजन बढ़ना, बाल झड़ना और भावनात्मक असंतुलन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव से PCOS को नियंत्रित किया जा सकता है। निदान के लिए अल्ट्रासाउंड, हार्मोनल ब्लड टेस्ट और मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण किया जाता है। उपचार में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन शामिल है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।COS यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हार्मोनल विकार है जो प्रजनन आयु की महिलाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। सितंबर को हर साल PCOS Awareness Month के रूप में मनाया जाता है ताकि महिलाओं को इस बीमारी के लक्षण, कारण और निदान के बारे में जागरूक किया जा सके। इस स्थिति में महिलाओं के अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और गर्भधारण में कठिनाई आती है। इसके लक्षणों में चेहरे और शरीर पर मोटे बाल, मुँहासे, वजन बढ़ना, बाल झड़ना और भावनात्मक असंतुलन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव से PCOS को नियंत्रित किया जा सकता है। निदान के लिए अल्ट्रासाउंड, हार्मोनल ब्लड टेस्ट और मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण किया जाता है। उपचार में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन शामिल है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।COS यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हार्मोनल विकार है जो प्रजनन आयु की महिलाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। सितंबर को हर साल PCOS Awareness Month के रूप में मनाया जाता है ताकि महिलाओं को इस बीमारी के लक्षण, कारण और निदान के बारे में जागरूक किया जा सके। इस स्थिति में महिलाओं के अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और गर्भधारण में कठिनाई आती है। इसके लक्षणों में चेहरे और शरीर पर मोटे बाल, मुँहासे, वजन बढ़ना, बाल झड़ना और भावनात्मक असंतुलन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव से PCOS को नियंत्रित किया जा सकता है। निदान के लिए अल्ट्रासाउंड, हार्मोनल ब्लड टेस्ट और मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण किया जाता है। उपचार में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन शामिल है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

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Author: gaurav

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