
कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ती नजर आ रही है। नए नियमों और सख्त प्रक्रियाओं की चर्चाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब PF वह भरोसेमंद सहारा नहीं रहेगा, जिस पर लोग घर खरीदने, गंभीर बीमारी या बच्चों की शादी जैसे बड़े खर्चों के समय निर्भर रहते थे। नौकरीपेशा वर्ग के लिए PF सिर्फ रिटायरमेंट फंड नहीं, बल्कि जीवन की आपात जरूरतों का मजबूत आधार माना जाता रहा है।
PF अकाउंट का संचालन करने वाली संस्था कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नियमों में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। हाल के वर्षों में क्लेम प्रोसेस, एडवांस निकासी और पात्रता से जुड़े नियम ज्यादा सख्त हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां जरूरत पड़ने पर PF से रकम निकालना अपेक्षाकृत आसान था, अब लंबी प्रक्रिया और सीमाओं के कारण यह मदद समय पर नहीं मिल पाती।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर PF की भूमिका सीमित होती गई, तो मिडिल क्लास के सामने बड़ा सवाल खड़ा होगा—घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट, मेडिकल इमरजेंसी या बच्चों की शादी जैसे खर्चों में सहारा कौन बनेगा? ऐसे में लोग वैकल्पिक निवेश और इंश्योरेंस विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि सरकार और EPFO का तर्क है कि PF का मूल उद्देश्य रिटायरमेंट सुरक्षा है, न कि बार-बार निकासी, ताकि भविष्य में कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता मिल सके।

