
सार:
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। जॉर्ज टाउन थाना क्षेत्र स्थित स्वामीनारायण मंदिर का तीन मंजिला पिछला हिस्सा अचानक भरभराकर मंदिर के पीछे खोदे गए गहरे गड्ढे में जा गिरा। तेज आवाज के साथ हुए हादसे से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त ढहे हिस्से में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। शुरुआती तौर पर लगातार बारिश, गड्ढे में पानी भरने और मिट्टी खिसकने को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है।
विस्तार:
प्रयागराज के जॉर्ज टाउन इलाके में शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब स्वामीनारायण मंदिर का तीन मंजिला हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे जा गिरा। मंदिर के पीछे निर्माण कार्य के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में पूरी संरचना का एक बड़ा हिस्सा समा गया। हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग अपने घरों व दुकानों से बाहर निकल आए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ क्षणों में ही मंदिर की इमारत का पिछला हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद जॉर्ज टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
जानकारी के अनुसार मंदिर के पीछे पिछले करीब तीन से चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। यहां एक नई इमारत के निर्माण के लिए काफी गहरा और बड़ा गड्ढा खोदा गया था। कुछ रिपोर्टों में इसे अपार्टमेंट निर्माण से जुड़ा बताया गया है। लगातार बारिश के कारण गड्ढे में पानी भर रहा था और खराब मौसम की वजह से पिछले कुछ दिनों से निर्माण कार्य भी बंद था।
आशंका है कि गड्ढे में लगातार पानी जमा होने और मिट्टी के कटाव के कारण मंदिर के पीछे की जमीन कमजोर होती चली गई। इसका असर मंदिर की नींव पर पड़ा और आखिरकार तीन मंजिला हिस्सा अपना भार संभाल नहीं सका। हालांकि, अधिकारियों और पुलिस की ओर से हादसे की अंतिम वजह की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी।
प्रयागराज में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बनी हुई है। ऐसे में मंदिर के ठीक पीछे खोदे गए गहरे गड्ढे में पानी जमा होना और उसके आसपास की मिट्टी का कमजोर होना हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के पानी की वजह से गड्ढे के आसपास की मिट्टी में नमी बढ़ गई थी। इसके चलते मंदिर की नींव के आसपास का हिस्सा कमजोर हो सकता है। कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि मंदिर की दीवारों पर सीलन बढ़ रही थी। हालांकि ये सभी शुरुआती आशंकाएं हैं और तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी।
इस हादसे में सबसे राहत वाली बात यह रही कि मंदिर का जो हिस्सा गिरा, उसमें हादसे के वक्त कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। यही वजह रही कि तीन मंजिला हिस्सा गिरने के बावजूद किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि घटना के समय ढहे हुए हिस्से में कोई मौजूद नहीं था।
बताया गया है कि मंदिर का गिरा हुआ हिस्सा धर्मशाला के तौर पर भी इस्तेमाल होता था, जहां श्रद्धालु ठहरते थे। खासकर दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु यहां रुकते थे। लेकिन खराब मौसम और बारिश के चलते इन दिनों वहां श्रद्धालुओं की आवाजाही कम थी। हादसे के समय किसी के मौजूद नहीं होने से एक बड़ा हादसा टल गया।
मंदिर का हिस्सा गिरते ही आसपास के क्षेत्र में तेज आवाज सुनाई दी। स्थानीय लोगों को अचानक लगा कि जैसे कोई बड़ा धमाका हुआ हो। कई लोगों ने बताया कि आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें कुछ देर के लिए भूकंप जैसा महसूस हुआ। इसके बाद लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर घटनास्थल की तरफ पहुंचने लगे।
गड्ढे में मंदिर का हिस्सा गिरने के साथ वहां मौजूद मिट्टी और कीचड़ भी उछलकर आसपास तक पहुंच गया। आसपास खड़े वाहनों पर भी कीचड़ जमा होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में काफी देर तक डर और चिंता का माहौल बना रहा।
घटना की जानकारी मिलते ही जॉर्ज टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई। थाना प्रभारी रुकुमपाल सिंह के मुताबिक हादसे के समय मंदिर के उस हिस्से में कोई मौजूद नहीं था, इसलिए किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। शुरुआती तौर पर बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव को मंदिर का हिस्सा गिरने की संभावित वजह माना जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन और पुलिस की ओर से हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण स्थल पर किस तरह का काम चल रहा था और गड्ढा कितना गहरा था। इसके साथ ही मंदिर की बाकी संरचना की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी माना जा रहा है।
इस घटना ने निर्माण कार्य के दौरान आसपास मौजूद पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी पुरानी या मौजूदा इमारत के बिल्कुल पास गहरी खुदाई होने पर जमीन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। खासकर बारिश के मौसम में गड्ढे में पानी भरने और मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ जाता है।
स्वामीनारायण मंदिर के मामले में भी निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे और मंदिर की नींव के बीच पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी या नहीं, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। हालांकि अभी किसी पर लापरवाही का आरोप तय नहीं किया गया है और हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
मंदिर का तीन मंजिला हिस्सा जिस तरह गहरे गड्ढे में गिरा, उससे आसपास मौजूद अन्य इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय लोगों में चिंता पैदा हो गई है। लगातार बारिश और निर्माण स्थल की स्थिति को देखते हुए आसपास के भवनों की नींव पर इसका कोई असर पड़ा है या नहीं, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन निर्माण स्थल की तकनीकी जांच कराए और यह सुनिश्चित करे कि आगे किसी अन्य इमारत या व्यक्ति को खतरा न हो। अगर जमीन कमजोर हुई है तो आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की जरूरत है।
प्रयागराज में हुआ यह हादसा भले ही बड़ा था, लेकिन इसमें किसी की जान नहीं जाने से लोगों ने राहत की सांस ली है। तीन मंजिला हिस्सा रात के समय गिरा और उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था। अगर यही घटना दिन में या श्रद्धालुओं की मौजूदगी के दौरान होती, तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती थी।
फिलहाल हादसे के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता मंदिर की बाकी संरचना और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करना है। साथ ही निर्माण स्थल की स्थिति, मिट्टी के कटाव और गड्ढे में पानी भरने जैसी परिस्थितियों की तकनीकी जांच जरूरी है।
प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मंदिर का हिस्सा केवल बारिश और मिट्टी के कटाव की वजह से गिरा या निर्माण के दौरान किसी तकनीकी कमी ने भी इसमें भूमिका निभाई। फिलहाल शुरुआती जानकारी में बारिश, जलभराव और जमीन के कमजोर होने को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है।
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