
राजस्थान में एक केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके और आग की घटना में कम से कम 8 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखा निर्माण का काम चल रहा था, जहां ज्वलनशील रसायनों का असुरक्षित भंडारण किया गया था। धमाका इतना तेज था कि इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद मौके पर पहुंची बचाव टीमों को जले हुए शवों के टुकड़े अलग-अलग स्थानों से इकट्ठा करने पड़े, जिन्हें पॉलीथीन में रखा गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री के पास वैध विस्फोटक या पटाखा निर्माण लाइसेंस नहीं था। आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए रसायन और विस्फोटक सामग्री जमा की गई थी, जिससे विस्फोट का जोखिम अत्यधिक बढ़ गया। स्थानीय स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि क्या फैक्ट्री संचालन में नियमों की अनदेखी के बावजूद गतिविधियां जारी रहने दी गईं। इस तरह की अवैध इकाइयों में अक्सर अग्नि सुरक्षा, वेंटिलेशन और आपात निकास व्यवस्था का अभाव होता है, जो हादसे को और घातक बना देता है।
घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतकों की पहचान और डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है, क्योंकि कई शव गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों के इलाज की व्यवस्था का आश्वासन दिया है। साथ ही पूरे क्षेत्र में अवैध पटाखा और केमिकल इकाइयों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाने की घोषणा की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध विस्फोटक और पटाखा निर्माण इकाइयां अक्सर औद्योगिक क्षेत्रों या ग्रामीण इलाकों में छिपकर संचालित होती हैं, जहां निगरानी कम होती है। ऐसे स्थानों पर रसायनों का असुरक्षित मिश्रण और भंडारण बड़े विस्फोट का कारण बन सकता है। राजस्थान की यह घटना औद्योगिक सुरक्षा और नियामक निगरानी की गंभीर चुनौती को उजागर करती है। प्रशासनिक सख्ती और नियमित निरीक्षण के बिना इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकना कठिन माना जा रहा है।









