
अयोध्या के राममंदिर को एक गुमनाम भक्त ने करीब 30 करोड़ रुपये मूल्य की भव्य प्रतिमा दान में दी है। यह प्रतिमा कर्नाटक शैली में तैयार की गई है, जिसमें शिल्पकला की बारीकियां और पारंपरिक सौंदर्य साफ झलकता है। प्रतिमा में सोना, चांदी और हीरे जड़े गए हैं, जिससे इसकी भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा और बढ़ गई है। इस दान को मंदिर से जुड़े लोगों ने श्रद्धा और भक्ति का अनुपम उदाहरण बताया है।
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, प्रतिमा का निर्माण महीनों की मेहनत और विशेषज्ञ कारीगरों की देखरेख में किया गया है। कर्नाटक शैली की पहचान—संतुलित अनुपात, सूक्ष्म नक्काशी और दिव्य भाव—इस प्रतिमा में स्पष्ट दिखाई देती है। बहुमूल्य धातुओं और रत्नों का उपयोग पारंपरिक नियमों और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप किया गया है, ताकि शिल्प और आस्था—दोनों की मर्यादा बनी रहे।
प्रतिमा को राममंदिर परिसर के एक विशेष निर्धारित स्थल पर स्थापित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु शांत वातावरण में दर्शन कर सकें। स्थापना से पहले विधि-विधान के अनुसार पूजा और अनुष्ठान किए जाएंगे। ट्रस्ट का कहना है कि स्थान चयन का उद्देश्य भक्तों की सुगम आवाजाही, सुरक्षा और धार्मिक परंपराओं का पालन सुनिश्चित करना है।
इस गुमनाम दान ने एक बार फिर राममंदिर से जुड़ी वैश्विक आस्था को रेखांकित किया है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनेगी और मंदिर की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध करेगी।

