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RSS और BJP की ‘विचारधारा सर्वोपरि’ नीति: क्यों यहाँ कार्यकर्ता बनता है PM और लालसा रखने वाले बन जाते हैं मार्गदर्शक?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक गलियारों में अक्सर चर्चा होती है। लेकिन जो एक बात इन्हें अन्य राजनीतिक दलों से बिल्कुल अलग करती है, वह है— ‘व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ी विचारधारा यहाँ किसी व्यक्ति का कद उसकी महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि संगठन के प्रति उसके समर्पण और काम करने की काबिलियत से तय होता है

  1. विचारधारा की शक्ति: मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का सफर

संघ और भाजपा की सबसे बड़ी खूबी उनकी बौद्धिक उदारता (Broad Thinking) है। यहाँ एक साधारण स्वयंसेवक, जो केवल विचारधारा को केंद्र में रखकर काम करता है, वह सफलता के उस शिखर तक पहुँच सकता है जिसकी कल्पना अन्य वंशवादी पार्टियों में करना असंभव है। 

  1. काबिलियत का सम्मान: यदि किसी इंसान में जमीन पर काम करने की क्षमता है और वह संगठन के प्रति वफादार है, तो तंत्र उसे नीचे से उठाकर शीर्ष पर बैठाने में संकोच नहीं करता।

मौजूदा नेतृत्व इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाला कार्यकर्ता मुख्यमंत्री और फिर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बन जाता है। यह केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं, बल्कि विचारधारा के प्रति समर्पण का प्रतिफल है।

लालसा और अहंकार का परिणाम:मार्गदर्शक मंडलकी अवधारणा

जहाँ एक ओर विचारधारा को मानने वालों को शिखर मिलता है, वहीं दूसरी ओर जो लोग खुद को संगठन या विचारधारा से ऊपर समझने लगते हैं, उनके लिए राहें बदल दी जाती हैं।

  1. स्वयं से ऊपर संगठन: जब किसी व्यक्ति के भीतर पद की लालसा या व्यक्तिगत चश्मा विचारधारा पर हावी होने लगता है, तो संगठन उसे सम्मानजनक तरीके से सक्रिय राजनीति से दूर कर देता है।
  1. अनुभव का उपयोग, नेतृत्व का बदलाव: संघ की यह सोच बहुत स्पष्ट है कि पद स्थायी नहीं है। जो लोग सत्ता की चकाचौंध में अपनी जड़ों को भूलने लगते हैं, उन्हेंमार्गदर्शककी भूमिका में भेज दिया जाता है, ताकि नई पीढ़ी को मौका मिल सके और संगठन की गतिशीलता बनी रहे।

 क्या है सफलता का मूलमंत्र?     RSS की यही सोच उसे एकअनुशासित सेनाबनाती है। यहाँ इंसान की काबिलियत को तब तक ही पंख मिलते हैं, जब तक उसके पैर संगठन की जमीन से जुड़े होते हैं। जो विचारधारा की मर्यादा में रहकर काम करता है, उसे इतिहास रचने का मौका मिलता है, और जो मर्यादा लांघने की कोशिश करता है, उसे इतिहास की यादों (मार्गदर्शक मंडल) में सुरक्षित कर दिया जाता है।

gaurav
Author: gaurav

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