
अक्सर विवादों में रहने वाली एक आरटीओ मैडम इन दिनों अपनी ही संभाग की कमिश्नर मैडम पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं। मामला इतना आगे बढ़ चुका है कि संभागीय कमिश्नर ने आरटीओ मैडम को निलंबित करने के लिए विभाग के प्रभारी प्रमुख सचिव को पत्र तक लिख दिया था। लेकिन करीब सात महीने बीतने के बाद भी न तो आरटीओ मैडम निलंबित हुईं और न ही उनका तबादला किया गया। मामले का दूसरा पहलू यह है कि क्षेत्र के विधायक ने भी आरटीओ मैडम को हटाने के लिए मंत्री से लेकर सरकार तक पत्र लिखकर गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
आरटीओ मैडम पर आरोप है कि सरकारी काम समय पर पूरे नहीं किए जाते और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का भी अपेक्षित पालन नहीं होता। इसके अलावा भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें भी सरकार तक पहुंचने की बात सामने आई है, लेकिन इन शिकायतों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। बताया जाता है कि इससे पहले मैडम एक बड़े जिले में पदस्थ थीं, जहां उन्हें निलंबन का सामना करना पड़ा था। बाद में वे एक बार फिर दूसरे बड़े जिले में पोस्टिंग हासिल करने में सफल रहीं। इसी वजह से उनकी वर्तमान पोस्टिंग और उनके खिलाफ की गई शिकायतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब सवाल यह है कि जब संभाग की कमिश्नर से लेकर क्षेत्र के विधायक तक आरटीओ मैडम को हटाने की पैरवी कर चुके हैं, तो आखिर विभागीय कार्रवाई की फाइल किस मोड़ पर अटकी हुई है? करीब सात महीने पहले निलंबन के लिए पत्र लिखे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से मामला लगातार चर्चा में है। आरटीओ मैडम के खिलाफ लगाए गए आरोपों और शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है, लेकिन निलंबन और तबादले को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया के कारण विभागीय स्तर पर सवाल जरूर उठ रहे हैं।
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