
तकनीकी वाले विभाग में सचिव का प्रभार एक ऐसे आईएएस साहब को दिया गया है, जो पहले भी इसी विभाग की कमान संभाल चुके हैं। फर्क इतना है कि पिछली बार साहब विभाग के प्रभारी प्रमुख सचिव हुआ करते थे, जबकि इस बार सचिव के तौर पर वापसी हुई है। साहब के आने की एक वजह विभाग की सुस्त रफ्तार को भी माना जा रहा है। मौजूदा प्रमुख सचिव का विभाग में मन नहीं लगने की बातें सामने आती रही हैं और इसका असर कई प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर भी पड़ा। एक बार तो बड़े साहब ने भी प्रमुख सचिव से यहां तक कह दिया था कि ऐसा लगता है, जैसे आपके विभाग में कोई काम होता ही नहीं है।
इसके बाद सचिव साहब की दोबारा एंट्री हुई। आते ही उन्होंने पुराने प्रोजेक्ट्स की फाइलें खंगालने के साथ नए प्रोजेक्ट्स की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अब तक आराम से चल रहे अफसरों के लिए साहब की वापसी किसी अलार्म से कम नहीं है। समीक्षा बैठकें शुरू होते ही विभाग में कामकाज की रफ्तार बढ़ गई है। जिन अफसरों की अब तक मौज चल रही थी, उन्हें अब फाइलों से लेकर प्रोजेक्ट्स तक का हिसाब देना पड़ रहा है। विभाग के कामकाज पर सचिव साहब की नजर पड़ने के बाद अफसरों में भी सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।
यानी सचिव साहब की वापसी के साथ विभाग में “मौज” का दौर खत्म और “काम” का दौर शुरू होता नजर आ रहा है। पुराने प्रोजेक्ट्स की स्थिति से लेकर नए प्रोजेक्ट्स की प्रगति तक की समीक्षा की जा रही है। पहले जिन फाइलों और योजनाओं पर काम धीमी गति से चल रहा था, अब उन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सचिव साहब की वापसी के बाद तकनीकी विभाग में कामकाज की रफ्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं और कई अफसरों को अब अपने लंबित कामों और प्रोजेक्ट्स का हिसाब देना पड़ रहा है।
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